रायपुर । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वादा किया था कि हम यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा आयोजित करायेंगे लेकिन पिछले दो बार से पीएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ियां हो रही है।
1. 2025 में पीएससी के द्वारा कुल 265 पद निकाला गया।
2. मुख्य परीक्षा में कुल पद के तीन गुना लोग उत्तीर्ण होकर साक्षात्कार में आते
265 x 3 = 795 इंटरव्यू में आना चाहिए।
608 लोग ही उत्तीर्ण इंटरव्यू में पहुंचे।
इनका तर्क है कि 187 बच्चे न्यूनतम नंबर नहीं ला पाये।
आयोग साबित करे कि 187 बच्चे न्यूनतम नंबर नहीं लाये।
बच्चों का दावा है कि हमारा न्यूनतम नंबर तो आया ही होगा।
आयोग इंटरव्यू के पहले सभी बच्चों को कापी उपलब्ध कराये।
2024 की मुख्य परीक्षा में कापी जांचने में गड़बड़ी हुई है।
पिछली परीक्षा 2024 के दो अभ्यर्थियों की कापियां सामने है जिसमें मूल्यांकन में बड़बड़ी सामने है-
प्रश्न क्रमांक 5(i)(a), (b) में दोनों के उत्तर सही व समान है, लेकिन प्रथम वाले छात्र को 2 में से 0 अंक एवं दूसरे छात्र को 2 में 2 अंक दिया गया है।
भक्तिन माता राजिम – राजिम भक्तिन माता तेलिन वाले उत्तर में प्रथम छात्र को सही लिखने पर 8 में 3.5 अंक, जबकि दूसरे छात्र ने गलत उत्तर (कोण्डागांव व आदिवासी समाज की देवी) लिखा है लेकिन उन्हें 1.5 अंक मिला। जबकि इसमें इनको शून्य नंबर मिलना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में होमरूल लीग की स्थापना- प्रथम छात्र ने होमरूल लीग का सही उत्तर लिखा जिसे 4 में 2.5 अंक मिला, जबकि दूसरे छात्र ने होमरूल लीग को वर्ष 1923 एवं स्वराज दल के उत्तर लिखा, जो पूरी तरह से गलत है उसे भी 2.5 अंक मिला। सही और गलत को बराबर नंबर दिया गया है।
घरेलू हिंसा से व्यथित व्यक्ति- इस उत्तर में प्रथम व्यक्ति ने व्यथित व्यक्ति पुरूष को बताया जो गलत है व उसे 2 में 0.5 अंक मिला जबकि दूसरे छात्र ने सही उत्तर दिया उसे भी 0.5 अंक मिला। सही, गलत को बराबर नंबर दिया है।
बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण – महाभिनिष्क्रमण का दोनों छात्रों ने सही उत्तर लिखा। एक छात्र को 2 में 0.5 अंक, जबकि दूसरे छात्र को 2 में 1.5 अंक मिला।
पिछले बार 2024 में पीएससी अध्यक्ष रीता सांडिल्य के रहते गड़बड़ी हुई थी, 2025 में उनकी ही अध्यक्षता में गड़बड़ी हुई। 2024 में पीएससी परीक्षा में उत्तर-पुस्तिका की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों (शिक्षक एलबी) से कराई गई, यही नहीं मूल्यांकनकर्ताओं का नाम और नंबर भी सार्वजनिक हुआ था, जो बेहद आपत्तिजनक है। भर्ती परीक्षा की गोपनियता को भंग करने वालों को सजा देने के बजाय पुरस्कृत करते हुए रीता सांडिल्य को पीएससी के कार्यकारी अध्यक्ष से प्रमोट करते हुए अध्यक्ष बना दिया गया है। बेहद स्पष्ट है कि इन गड़बड़ियों को सरकार का संरक्षण है।
राज्य सेवा परीक्षा 2024 में भी मुख्य परीक्षा के परिणाम के पश्चात साक्षात्कार के लिए 95 अभ्यर्थियों को कम लिया गया था। उस समय भी 1ः3 का पालन नहीं किया गया था।
मांग
सरकार मामले के निराकरण तक इंटरव्यू स्थगित करे।
अभ्यर्थियों की मांग के अनुसार सभी का उत्तर-पुस्तिकायें साक्षात्कार के पहले सार्वजनिक किया जाए ताकि सभी अभ्यर्थियों को यह पता लगे कि उनकी कापियां सही जांची गयी है।
जो लोग इंटरव्यू के लिए चयनित हुये है उनके अतिरिक्त शेष सभी अभ्यर्थियों की कापियां अभ्यर्थियों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए।
उत्तर-पुस्तिका जांचने के लिए मूल्यांकनकर्ताओं का मानदंड तय किया जाए तथा पीएससी मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी करे।
आयोग सभी अभ्यर्थियों के उत्तर-पुस्तिकाओं का पुर्नमूल्यांकन करे एवं साक्षात्कार के लिए 1ः3 का पालन करे।




