पंकज विश्वकर्मा
समाचार संपादक,
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास को लेकर आज रायपुर प्रेस क्लब में अचानक टीवी चैनलों और अखबारों के पन्नों से निकल कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच एक खुली बहस हुई। कुछ समय से इन दोनों नेताओं के बीच मिडिया बाइट के दौरान प्रधानमंत्री आवास के आंकड़ों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था।
जिस पर दोनों नेताओं द्वारा खुले और सार्वजनिक मंच पर एक दूसरे को बहस की चुनौती भी दी गई थी। राजनैतिक हलकों में इस बहस के लिए रायपुर प्रेस क्लब को मंच के रूप में इस्तेमाल करने की चर्चा कुछ दिनों से थी, पंरतु आज अप्रत्याशित रूप से दोनों नेता उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर प्रेस क्लब पहुंच गए।
यह भी पढ़े :- भूपेश बघेल Vs विजय शर्मा! PM आवास पर डिबेट के बाद सोशल मीडिया पर छिड़ा पोस्टर वार
आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अन्य विषयों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अपने अन्य कार्यक्रम पूर्व निर्धारित थे कि अचानक दोनों नेताओं ने रायपुर प्रेस क्लब पहुंचने का संदेश जारी कर दिया। कुछ ही देर में खुली बहस शुरू भी हो गई पंरतु इस दौरान आकंड़ों को लेकर दोनों नेताओं के बीच जमकर तकरार हुई। इस बहस के बाद तुरंत ही भाजपा-कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया पर वार-पलटवार का पोस्टर वॉर शुरू हो गया है।

इस बहस में जहां उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वित्तीय वर्ष 2016-17 से वित्तीय वर्ष 2026-27 तक प्रतिवर्ष स्वीकृत और निर्मित प्रधानमंत्री आवास के आंकड़ों को रखा वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आंकड़ों को सिरे से ख़ारिज कर डाला। जहां उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट दावा किया कि ये आकंड़े सार्वजनिक है और केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री आवास योजना के पोर्टल में है इसे राज्य और राष्ट्र का कोई भी व्यक्ति देख सकता है।

किसी भी विषय के आंकड़े और उसकी सांख्यिकी को समझना एक जटिल प्रक्रिया होती है। वर्षानुसार कुछ आंकड़ों को हम समझने का प्रयास करते हैं। वर्ष 2016-17 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और मुख्यमंत्री रमन सिंह थे तब छत्तीसगढ़ में कुल 2,32,903 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए थे परन्तु भौतिक रूप से कुल 136 आवास ही पूर्ण हो सकें थे।

मतलब 2,32,767 आवास निर्माणाधीन थे। वर्ष 2017-18 में 2,06,372 आवास स्वीकृत किए गए और 3,65,867 आवास पूर्ण हो गये। मतलब दो वर्षों में कुल 4,39,275 आवास स्वीकृत और 3,66,003 आवास पूर्ण हो गये। वित्तीय वर्ष 2018-19 के शुरुआती दिनों में मुख्यमंत्री थे रमन सिंह और वित्तीय वर्ष समाप्त होते-होते प्रदेश में सरकार बदल जाती है और मुख्यमंत्री बन गए भूपेश बघेल। वर्ष के शुरुआती दिनों में ही तात्कालिक भाजपा सरकार ने 3,48,960 आवास स्वीकृत कर दिए थे।

कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में मात्र 1,51,096, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1,57,420 वित्तीय वर्ष 2021-22 में 0 और वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी 0 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होती है और इस हार में भाजपा का सबसे बड़ा मुद्दा प्रधानमंत्री आवास योजना रहा था। भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने 18 लाख आवास के निर्माण का लक्ष्य रखा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 10,26,586, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3,00767 और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3,65,179 आवासों की स्वीकृति प्रदान किया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार अभी तक इन दस वर्षों में कुल 28,57,913 स्वीकृत आवासों में 20,57,111 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार वास्तविक आंकड़ों की बात करें तो योजना के लागू होने के बाद रमन सिंह सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में कुल 7,07381 आवासों का निर्माण किया गया है और पांच साल के भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कुल 3,06,037 आवासों का निर्माण किया गया है। वर्तमान भाजपानीत विष्णु देव सरकार के ढाई साल के कार्यकाल के दौरान कुल 11,51,431 आवास पूर्ण हो गये है।
कुल मिलाकर आंकड़ों के इस मायाजाल में जहां उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपनी बात दमदारी से रखी वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना महामारी के दौरान पैदा हुई आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों का भी उल्लेख कर इन आंकड़ों को नकार दिया। हम कुछ सांख्यिकी डाटा आपके सामने रखते हैं निर्णय आप करें।
यक्ष प्रश्न तो यही रह गया कि प्रधानमंत्री आवास पर भूपेश और विजय की इस खुली और सार्वजनिक बहस महज़ आंकड़ों का मायाजाल था या इन आंकड़ों ने एक वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है और क्या अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति का पटाक्षेप हो जायेगा या अगले विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा…..?




