नई दिल्ली। UPI यानी Unified Payments Interface आज देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। पेटीएम, फोनपे, गूगल पे और भीम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए लोग दुकानों, शोरूम और ऑनलाइन सेवाओं के लिए कुछ सेकंड में भुगतान कर देते हैं। ऐसे में UPI शुल्क को लेकर सामने आई जानकारी ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या अब UPI से पेमेंट करने पर ग्राहक को भी पैसे देने होंगे? क्या 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर चार्ज लगेगा? और अगर चार्ज लगेगा तो इसका भुगतान कौन करेगा?
ग्राहक को UPI पेमेंट के लिए सीधे शुल्क देना होगा?
UPI से सामान्य ग्राहक-से-व्यापारी भुगतान को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि MDR यानी Merchant Discount Rate का शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के बजाय व्यापारी/कारोबारी पक्ष से जुड़ा होता है। यानी QR कोड स्कैन करके भुगतान करने वाले ग्राहक से अलग से UPI चार्ज लेने की बात नहीं है।

हालांकि, व्यापारी से MDR लिया जाता है या नहीं और उसकी दर कितनी है, यह भुगतान के प्रकार, व्यापारी की श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए हर 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर अपने आप 0.4 प्रतिशत शुल्क लगने की बात को सामान्य नियम के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
क्या है MDR?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले व्यापारी पक्ष पर लगाया जा सकता है। इसमें भुगतान से जुड़े बैंक और अन्य सेवा प्रदाताओं की लागत शामिल हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी विशेष भुगतान श्रेणी पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू है और ग्राहक ने 5,000 रुपये का भुगतान किया, तो शुल्क 20 रुपये होगा। 10,000 रुपये के भुगतान पर यह राशि 40 रुपये होगी।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को UPI ऐप पर जाकर ये 20 या 40 रुपये अलग से चुकाने होंगे।
बड़े भुगतान पर क्यों हो रही है चर्चा?
UPI के जरिए होने वाले लेन-देन की संख्या बहुत बड़ी है। इनमें छोटे भुगतान सबसे ज्यादा हैं, जबकि बड़े भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।
इसी वजह से बड़े कारोबारी भुगतान पर शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही है। सरकार और NPCI की ओर से समय-समय पर अलग-अलग श्रेणियों के डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क संबंधी नियम तय किए जाते हैं।
क्या 2000 रुपये तक UPI पूरी तरह फ्री है?
UPI के छोटे भुगतानों को लेकर सरकार ने लंबे समय से जीरो-MDR व्यवस्था बनाए रखी है। खासकर छोटे व्यापारियों और कम मूल्य वाले डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए शुल्क नहीं लेने की व्यवस्था महत्वपूर्ण रही है।
वहीं, कुछ विशेष श्रेणियों के भुगतान में अलग शुल्क व्यवस्था हो सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर UPI ट्रांजैक्शन पर एक समान शुल्क लागू हो गया है।
क्या दुकानदार ग्राहक से यह शुल्क वसूल सकता है?
यदि किसी भुगतान पर व्यापारी पक्ष के लिए MDR लागू होता है, तो वह भुगतान स्वीकार करने की लागत है। इसे ग्राहक से अलग से ‘UPI चार्ज’ बताकर वसूलने के नियम अलग विषय हैं। ग्राहक को भुगतान करते समय ऐप पर दिखने वाली राशि और व्यापारी द्वारा मांगे गए किसी अतिरिक्त शुल्क में अंतर समझना जरूरी है।
यदि कोई दुकानदार UPI भुगतान पर अतिरिक्त पैसा मांगता है, तो ग्राहक को बिल और भुगतान की शर्तें स्पष्ट रूप से पूछनी चाहिए।
राजनीति भी हुई शुरू
UPI शुल्क को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि व्यापारी पर लगने वाला शुल्क अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहक तक पहुंच सकता है। उन्होंने इसे अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव से भी जोड़ने का दावा किया है।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने UPI की सफलता को केंद्र सरकार की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की उपलब्धि बताते हुए कांग्रेस की आलोचना को राजनीतिक विरोध करार दिया है।
AAP नेताओं ने भी UPI शुल्क को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि पहले UPI को मुफ्त बताया गया और अब शुल्क की व्यवस्था लाई जा रही है।
इन राजनीतिक दावों और आरोपों को संबंधित दलों के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
UPI की शुरुआत कब हुई?
भारत में UPI की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसके बाद डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा और आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक QR कोड और UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं।
UPI ने नकद भुगतान पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके जरिए बैंक खातों के बीच सीधे और तेजी से पैसे भेजे जा सकते हैं।
ग्राहक के लिए सबसे जरूरी बात
UPI से भुगतान करने वाले आम ग्राहक को हर बार अलग से UPI चार्ज देने की जरूरत नहीं है। MDR मुख्य रूप से व्यापारी पक्ष से संबंधित शुल्क व्यवस्था है। हालांकि अलग-अलग भुगतान श्रेणियों और नियमों के आधार पर शुल्क व्यवस्था अलग हो सकती है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावों से सावधान रहें जिनमें कहा जा रहा है कि “अब 2000 रुपये से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर ग्राहक के खाते से सीधे 0.4 प्रतिशत कटेगा।” इसे सामान्य UPI नियम मानना सही नहीं है।




