बिलासपुर/कोरबा, 23 जुलाई। Bilaspur High Court : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 7 साल पुराने आत्महत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के बरी करने वाले आदेश को पलट दिया है। जस्टिस एन.के. ब्यास की एकलपीठ ने आरोपी मो. सेराज को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया है।
अदालत ने कहा कि आरोपी की लगातार प्रताड़ना, शादी का दबाव, पीछा करना और धमकियों के कारण युवती के पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।
क्या है मामला?
मामला कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र का है। जनवरी 2018 में युवती अपने घर में फांसी पर लटकी मिली थी। जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट और मोबाइल फोन मिला। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।
लगातार प्रताड़ना के आरोप
अभियोजन के अनुसार आरोपी युवती से एकतरफा प्रेम करता था और उस पर शादी का दबाव बनाता था। मना करने पर वह युवती और उसकी मां को जान से मारने की धमकी देता था। प्रताड़ना से परेशान होकर युवती पहले भी आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में साक्ष्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने माना कि मौखिक गवाही, मेडिकल साक्ष्य और परिस्थितियां यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि आरोपी के व्यवहार ने युवती को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
27 जुलाई को सजा पर सुनवाई
हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 27 जुलाई को सजा तय करने के लिए सुनवाई की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने आरोपी या उसके अधिवक्ता को उस दिन उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।



