पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : “मास्टरस्ट्रोक” और “आपरेशन क्लीन” की ये पूरी इनसाइड स्टोरी की पटकथा आज की नहीं है इस पटकथा को लिखने के लिए बहुत लंबा वक्त लगा है और इस पटकथा के अनुसार कुछ और किरदार ना सिर्फ बर्खास्त होंगे बल्कि सलाखों के पीछे भी जाने वाले हैं क्योंकि जो ये सोचते हैं कि आदिवासी मुख्यमंत्री और आदिवासी सहकारिता मंत्री की आंखों में धूल झोंक कर “हम दोनों” अपनी झोली “किसानों के हक़” से भर लेंगे वो गलतफहमियां पालें बैठे हैं, “क्योंकि देर है पर अंधेर नहीं है”।
क्या पर्दे में चल रही और दिखाई जा रही पिक्चर और वास्तविकता में बड़ा फर्क है?
क्या अपेक्स में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है ? क्योंकि यहां तो दिखाई दे रहा है कि “अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग” ? रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN 24 की टीम 24 जून को अपेक्स की बोर्ड मीटिंग और प्रस्तुत एजेंडे की जानकारी लेने मुख्यालय पहुंचीं थीं, लेकिन वहां के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता और प्रबंध संचालक के.एन.कांडे ने टरका दिया।

क्योंकि विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हमारा पहला ही प्रश्न ही यह था कि बरमकेला कांड के मुख्य आरोपियों की बर्खास्तगी का आदेश कब जारी किया जाएगा और गबन के पैसों की रिकवरी कैसे संभव होगी।
क्योंकि हमारे सूत्रों ने बताया था कि बरमकेला ब्रांच की स्पेशल जांच पूर्ण हो गई है और उच्च प्रशासनिक स्तर पर मुख्य आरोपियों को सेवा से बर्खास्त करने के निर्देश दिए जा चुके हैं पंरतु फिर भी अपेक्स मुख्यालय में फाइलों को दबा दिया गया है।
क्या पिक्चर का हीरों वहीं है जो दिखाया जा रहा है ?
अचानक 24 जून को ही देर रात आनन-फानन में मिडिया के लिए प्रेस नोट बना कर सिर्फ अपने पक्ष के विशेष समाचार संस्थानों को जारी कर दिया जाता है। जारी प्रेस नोट में सभी कार्यवाहियों की वाहवाही और श्रेय प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता को दिया जाता है, पर क्यों ?


क्या किसी भी शासकीय/अर्धशासकीय निगम, मंडल और उद्यम में सभी निर्णयों के लिए अध्यक्ष और प्राधिकृत अधिकारी स्वतंत्र होते हैं और उन्हें शासन-प्रशासन से अनुमति की आवश्यकता ही नहीं होती है? वैसे भी जनवरी 2026 में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता ने अपेक्स में 645 करोड़ के घोटाले की बात स्वयं स्वीकार कर ली थी और वर्षों से सुनियोजित इन घोटालों की जांच के लिए ईओडब्ल्यू और एसीबी से कराने की घोषणा भी कर दी थी।
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पंरतु शायद उनके बैंक के उच्चतर प्रबंधन ने जानकारी नहीं दी थी कि इस प्रकार की जांच के लिए शासन-प्रशासन की मंजूरी अति आवश्यक और महत्वपूर्ण विषय होता है ? तो क्या कुलमिलाकर इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री साय और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप को नजरंदाज कर बैंक प्रबंधन और पीआर टीम ने सिर्फ एक व्यक्ति को हीरो बनाने का प्रयास किया ? जबकि कुछ समय पूर्व ही सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने भष्ट्राचार के आरोप झेल रहे अपेक्स के प्रबंध संचालक कमलनारायण कांडे को अपनी निजी पदस्थापना से हटा दिया था। बहरहाल बात मुद्दे और बड़ी खबर की……….
राज्य सरकार की सहकारिता में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
छत्तीसगढ़ में सहकारिता व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनाने की दिशा में साय सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में अपेक्स बैंक की बरमकेला शाखा में हुए 18.13 करोड़ रुपये के गबन मामले में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सहकारिता संस्थाओं में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के लिए किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दोषियों पर गिरी गाज : कड़ी कार्रवाई
बरमकेला शाखा में वर्ष 2021 से नवंबर 2024 के बीच हुए गबन की जांच में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित तीन नियमित कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा पांच आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। सभी दोषियों से राशि की वसूली की जाएगी तथा मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा की जा रही है। प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है।
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भविष्य में गड़बड़ी रोकने के लिए तकनीकी सुधार
सहकारिता विभाग द्वारा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए e-KCC पोर्टल पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी आधुनिक व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे ऋण वितरण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी।
किसानों का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों की मेहनत की कमाई और सहकारी संस्थाओं की साख की रक्षा करना है। सहकारिता व्यवस्था में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के माध्यम से सहकारिता क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, ताकि किसानों का विश्वास लगातार बना रहे।
उन्होंने कहा कि सहकारिता एक व्यवस्था है साथ ही किसानों की आर्थिक शक्ति का आधार है। सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक सहकारी संस्था ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करे तथा किसानों को बिना किसी बाधा के बेहतर सेवाएं उपलब्ध हों।



