पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़. सहकारिता विभाग के अपर आयुक्त कमलनारायण कांडे ने एक और कांड कर मात्र छः घंटे में मंत्रालय से जारी आदेश को बदलवा दिया। नये जारी आदेश ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भष्ट्राचार पर ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी की धज्जियां उडा़ दी।
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हालांकि विभागीय मंत्री केदार कश्यप ने कमलनारायण कांडे को अपने ओ.एस.डी. पद से हटा कर सरकार की साख में बट्टा लगाने से बचा लिया है। क्योंकि मुख्यमंत्री साय और विभागीय मंत्री केदार कश्यप सहित सभी मंत्रीगणों ने हर जगह भाजपानीत राज्य सरकार की भष्ट्राचार पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति का पुरज़ोर समर्थन और इस नीति का अडिगता से पालन प्रर्दशित किया है।
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राजनीति या अफसरशाही
मात्र छः घंटे में ऐसा क्या हो गया कि सुबह जारी आदेश के अनुसार अपेक्स के प्रबंध संचालक पद से कांडे को हटाया गया और शाम तक वापस प्रबंध संचालक के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसकी इनसाइड स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं है। कमलनारायण कांडे मूलतः राजनांदगांव जिले से है और लंबे समय तक कवर्धा शक्कर मिल के भी उच्चतर प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।

इस पूरे मामले में कांडे ने भाजपा और सरकार के सबसे मजबूत स्तंभों को अपनी बैसाखी बना लिया। कांडे ने पहले जारी आदेश के बाद राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में यह साबित कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह और अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी जिसे सामान्य रूप से चेयरमैन कहा जाता है केदारनाथ गुप्ता उसके समर्थन में हैं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विभागीय मंत्री केदार कश्यप किसी भी हाल में अपने वरिष्ठ डाॅ रमन सिंह के निर्देशों की अवमानना नहीं करेंगे। इसके साथ ही कल राज्य में किये गये बहुप्रतीक्षित प्रशानिक फेरबदल जिसमें 43 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों जिसमें मंत्रालय सहित 7 कलेक्टरों के प्रभार को परिवर्तित किया गया था और इस फेरबदल में सहकारिता विभाग भी शामिल है उसका फायदा उठा लिया। कांडे ने अफसरशाही को यह साबित किया कि वह राजनैतिक रूप से पूर्ण समर्थ है और राजनैतिक हलकों में यह स्थापित कर दिया कि वरिष्ठ अफसरों का मुझे पूर्ण समर्थन एवं विश्वास है ?
दो सिपहसालारों की बलि
अपेक्स के प्रबंध संचालक पद के लिए पहले उन्होंने अपने मुख्यालय के सहयोगियों को जातिगत समीकरण बता कर तैयार किया साथ ही अपने दो सिपहसालार एस.के साहू और हेमंत चौहान की बलि चढ़ा दी। आनन-फानन में दोनों को पुरानी जांच का हवाला देकर निलंबित कर दिया। जबकि पूरे गबन-घोटालो-फर्जीवाडो का ये मामला 2021 से चल रहा था मतलब कमलनारायण कांडे के प्रबंध संचालक पद पर नियुक्ति के बाद से।
क्या पिछले छः वर्षों में इतने भारी ट्रांजैक्शन और रकम पर मुख्यालय में किसी ने भी ध्यान नहीं दिया, क्या ये संभव है ? 48 बोगस ट्रांजैक्शन में 87.57 लाख, 547 बोगस ट्रांजैक्शन में 5.35 करोड़ रुपए और 2021-22 की कुल 5.80 करोड़ की घपलेबाजी कैसे संभव थी ? जबकि बैंकिंग सेक्टर में व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है। मतलब साफ है कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए कांडे ने अपने ही सिपहसालारों की बलि चढ़ा दी।

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यक्ष प्रश्न
रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल ने पहले ही यह बात उजागर कर दी थी कि कमल नारायण कांडे को जुलाई 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति के पूर्व अपेक्स के प्रबंध संचालक के पद से तत्काल हटाया जायेगा या कांडे के सभी कांडों को लीपापोती करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा ? 6 मई को जारी दोनों आदेशों ने यह साबित कर दिया कि कमलनारायण कांडे को अपेक्स बैंक में अपने सभी कांडों की लीपापोती करने का पर्याप्त अवसर दिया जायेगा। शुक्र है कि विभागीय मंत्री केदार कश्यप ने अपनी निजी पदस्थापना से कांडे को हटा दिया है।



