पंकज विश्वकर्मा
समाचार संपादक
बस्तर : अबूझमाड़ से
बस्तर : 2.0 मतलब विकास और विकास मसलन हर पेट और हर खेत को पानी, बस्तरिया की ज़बान में हल्बी-गोढीं के साथ ब्रिटिश या अमेरिकी एक्सेंट में अंग्रेजी, बस्तर में ही एम्स और उसका इलाज ? उसके चार-चिरोंजी-इमली-शहद को मिल सके लंदन, न्यूयॉर्क, सिडनी और एम्स्टर्डम का सुपर बाजार ? बस्तर 2.0 समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट या सिर्फ सरकारी दावों का एक पुलिंदा ?
प्रदेश ही नहीं देश- दुनिया के अपने तमाम पाठकों के लिए लेकर आए हैं एक ग्राउंड रिपोर्ट और सच का आईना। हालांकि हमें यह मानना होगा कि फिलहाल शायद ये जल्दबाजी होगी कि किसी नतीजे में तुरंत पहुंचा जायें। हम यानी “रायपुर न्यूज नेटवर्क” और “RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल” की टीम पहुंचेगी बस्तर के सूदूरवर्ती इलाकों में और निर्णय करेंगे आप। हम रखेंगे सिर्फ सत्य और आंखों देखी बैगैर किसी लाग लपेट के।

बस्तर और नक्सलवाद
देश में लगभग 75% नक्सल गतिविधियां छत्तीसगढ़ में केंद्रित थीं और उनका बड़ा हिस्सा बस्तर में था। छत्तीसगढ़ का बस्तर, प्रदेश का एक दक्षिणवर्ती इलाक़ा घने जंगलों, कठिन भूगोल और सीमित सरकारी पहुंच के कारण, माओवादी आंदोलन का सबसे मजबूत गढ़ बन गया था।
दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सलियों ने समानांतर ढांचा खड़ा किया, जिसमें जन अदालतें, हथियारबंद दस्ते और स्थानीय नेटवर्क शामिल थे और इसे वे जनताना सरकार कहते थे। जनताना सरकार मतलब लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल्यों को ध्वस्त करती एक समानांतर सत्ता।

केंद्र और प्रदेश में भाजपानीत सरकार का दावा है कि “अब माओवादियों का ज़्यादातर कैडर लगभग ख़त्म हो चुका है, जो हमारे लिए एक बड़ा बदलाव है।” वहीं छत्तीसगढ़ पुलिस का यह दावा है कि “पहले जो माओवादियों की फाइटिंग विंग थी या यूं कहें सैन्य ढांचा था वह लीडरशिप को ताकत देती थी, हालांकि अब वह भी लगभग ख़त्म हो चुकी है. जो कुछ कैडर बचे हैं, वह निचले कैडर के सिपाही ही बचे हैं जिनमें नेतृत्व क्षमता नहीं है”।

भारत और आजादी : अमृत काल
2026 में भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जिसके साथ देश की आज़ादी के 79 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस बार के राष्ट्रीय समारोह को “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” और “विकसित भारत @2047 के लिए युवा शक्ति” की थीम पर आयोजित किया जा रहा है।

ऐतिहासिक रूप से पहली बार स्वतंत्रता के इतिहास में पहली बार लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम्’ (राष्ट्रगीत) का गायन किया जायेगा। इस साल समारोह में Gen-Z और युवा शक्ति को केंद्र में रखा गया है, जिसमें इंटरनेशनल ओलंपियाड के विजेता और MY Bharat के युवा स्वयंसेवकों सहित लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। पूर्णतः स्वदेशी की तैयारी के साथ इस बार लाल किले पर सलामी और कार्यक्रमों में इस्तेमाल होने वाले सभी रक्षा उपकरण पूरी तरह से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत में निर्मित हैं।

लाल किला:नई दिल्ली और बस्तर
गूगल बाबा के अनुसार दिल्ली के लाल किले से बस्तर के बीजापुर की दूरी 1521 किलोमीटर है और इस दूरी को मात्र 28 घंटों में तय किया जा सकता है। वहीं गूगल बाबा ने यह भी बताया कि लाल किले से बस्तर के अबूझमाड़ की दूरी 1348 किलोमीटर है और इसे तो मात्र 25 घंटों में तय किया जा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बस्तर 2.0 और विकास कितने जल्दी यहां पहुंच पाता है ?

तो चलिए निकलते हैं इस यात्रा में और करते हैं पड़ताल मुद्दों कि और टटोलते हैं नब्ज़ बस्तर की।




