RNN24 ब्यूरो
रायपुर/छत्तीसगढ़. सहकारिता विभाग में शीर्ष स्तर पर चंद माह में ही 3 आयुक्तों के प्रशासनिक बदलाव के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार के संकेत नहीं दिख रहे हैं। राज्य के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज और रामचंद्रपुर स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखाओं में आदिवासी किसानों के साथ कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी KCC लोन (किसान क्रेडिट कार्ड) की एंट्री को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि उनकी धान बिक्री की राशि बिना किसी वास्तविक ऋण के “फर्जी KCC लोन” दिखाकर रोक दी गई है। इससे कई किसानों के परिवार आर्थिक संकट में हैं और उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो रही है बल्कि दैनिक जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।

हाल ही में राज्य सरकार द्वारा सहकारिता विभाग में वरिष्ठ IAS अधिकारी को आयुक्त एवं रजिस्ट्रार सहकारी समितियों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इस बदलाव के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में जताई गई है। पंरतु चंद माह माह में ही 3 आयुक्तों के प्रभार में फेरबदल क्या ज़मीनी स्तर में सुधार करेगा ?
जिले के किसानों के अनुसार कई खातों में पुराने KCC ऋण दर्ज कर उन्हें डिफॉल्ट या होल्ड श्रेणी में डाल दिया गया है। धान खरीदी की राशि राज्य सरकार द्वारा जारी तो कर दी गई है और धान बिक्री का पैसा भी खातों में आ गया है पंरतु खातों में होल्ड की वजह से राशि आहरित नहीं हो पा रही है।

ग्राम भंवरमाल निवासी किसान केदार सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके खाते में उस अवधि के भी लेन-देन दर्ज हैं, जब वे न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में थे। उनके अनुसार 1 जुलाई 2019 को ₹49,000, 3 जुलाई 2019 को ₹19,000 और 30 सितंबर 2021 को ₹8,000 की नकद निकासी दर्ज की गई है, जबकि वे उस समय जेल में थे। कुल ₹76,000 की यह एंट्री पूरी तरह से फर्जी बताई जा रही है।
किसान का दावा है कि उन्होंने कभी KCC ऋण लिया ही नहीं, फिर भी बैंक रिकॉर्ड में उनके नाम पर ऋण दर्ज कर दिया गया और इसी आधार पर उनका खाता होल्ड कर दिया गया। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के रिकॉर्ड में भी उनके नाम पर कोई ऋण दर्ज नहीं पाया गया है।इसके अलावा उनका दूसरा खाता भी जिला सहकारी बैंक रामचंद्रपुर में होल्ड है, जिससे 2025-26 की धान बिक्री राशि पूरी तरह अटक गई है।

स्थानीय स्तर पर अन्य सैकड़ों किसानों ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। आरोप है कि बिना वास्तविक ऋण के KCC एंट्री दिखाकर खातों को होल्ड किया जा रहा है और धान भुगतान रोका जा रहा है।

किसानों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच (SIT) की मांग मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्री रामविचार नेताम सहित जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से की है और रुकी हुई धान राशि तत्काल जारी करने की अपील की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल प्रशासनिक बदलाव से इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग पाएगी ? और क्या पहले से दर्ज कथित फर्जी मामलों की वसूली व जवाबदेही तय की जाएगी या यह मुद्दा भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा ?
आखिर कब अपेक्स सहित राज्य के सभी सहकारी बैंकों में चल रहे फर्जी तरीके के लोन और गबन-घोटालो-फर्जीवाडो पर रोक लगेगी और सहकारिता राज्य के सकल घरेलू उत्पाद और आय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकेगा?





