पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/ नई दिल्ली. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में दो कोल खनन परियोजनाओं के लिए अनुमानित रूप से 1,000 हेक्टेयर वन भूमि को उत्खनन के प्रथम चरण में अनुमोदित कर दिया गया है। भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (एफ.ए.सी) ने दोनों परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक रूप से प्रथम चरण की मंजूरी क्षतिपूरक एवं प्रतिपूरक वनीकरण शर्तों की सिफारिशों के साथ कर दी है। इनमें से एक परियोजना एस.ई.सी.एल और दूसरी परियोजना अदाणी समूह के सहायक कंपनी से जुड़ी है।
इस शुरूआती चरण की मंजूरी से छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में करीब 1,000 हेक्टेयर वन भूमि में कोल उत्खनन की दो अलग-अलग परियोजनाओं के लिए रास्ता साफ हो गया है। पहली परियोजना सरकारी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की पेलमा ओपनकास्ट खदान से जुड़ी है।

पेलमा ओपन कास्ट खदान को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड को आबंटित किया गया है और पेलमा कोलरीज, अडानी एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी को संचालन और खनन की अनुमति मिली है। यह कोल ब्लॉक रायगढ़ जिले के तमनार तहसील में स्थित है।
इस कोल उत्खनन परियोजना के लिए 362.10 हेक्टेयर वन भूमि को आबंटित किया गया है। इस परियोजना के लिए लगभग 52,000 से अधिक पेड़ों की कटाई की जाएगी, जिसका पर्यावरणविदों और ग्रामीणों से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इन खदानों में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही वाले पारिस्थितिक क्षेत्रों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। हालांकि सरकार ने क्षतिपूरक वनीकरण की शर्त के साथ इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है। एसईसीएल ने 2023 में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी पेलमा कोलियरीज के साथ खदान के संचालन के लिए समझौता किया था।

दूसरी परियोजना अदाणी समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड के पुरुंगा भूमिगत कोयला ब्लॉक से संबंधित है। अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड अडानी समूह की ही एक सहायक कंपनी है। यह कोल ब्लॉक छाल तहसील में घरघोड़ा एवं धरमजयगढ़ ब्लॉक के मांड-रायगढ़ कोयला क्षेत्र में स्थित है। यह परियोजना मांड-रायगढ़ कोयला क्षेत्रों के लगभग 8.7 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसमें अनुमानित 26 करोड़ टन कोयले का भंडार है। भूमि आवंटन अनुमानित रूप से 621.33 हेक्टेयर वन भूमि का है। यहां भी विवाद की स्थिति निर्मित है। यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची (PESA) के अंतर्गत आता है। स्थानीय समुदायों ने ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर इन खदानों के लिए जमीन दिए जाने का कड़ा विरोध किया है।

इन दोनों परियोजनाओं की प्रारंभिक चरण की सैद्धांतिक सहमति के लिए एफ.ए.सी ने 7 जुलाई की बैठक रखीं थीं। जिसमें दोनों परियोजनाओं के लिए वन भूमि के इस्तेमाल को चरण-1 की सैद्धांतिक मंजूरी देने की सिफारिश की गई है। इस मंजूरी में प्रतिपूरक वनीकरण समेत कई शर्तें शामिल हैं। इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही वन भूमि के अंतिम हस्तांतरण की चरण-2 मंजूरी दी जाएंगी
पेलमा परियोजना के लिए 52 हजार से अधिक पेड़ काटे जाएंगे.
एफ.ए.सी की बैठक के विवरण के अनुसार रायगढ़ के तमनार तहसील में पेलमा खदान के लिए 52,000 से अधिक पेड़ों की कटाई होगी। यह परियोजना उच्च संरक्षण मूल्य (एच.सी.वी) वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां घने जंगल हैं। खनन स्थल के पास केलो नदी भी बहती है। स्थानीय लोगों की चिंता है कि भूमिगत खनन से स्थानीय जल स्तर पर पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होंगी, जिससे गांवों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत सूख जाएंगे।



