बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। IIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक छात्रा के परिजनों से 12 लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगी का अहसास होने पर जब परिजनों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपी ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गूगल सर्च के जरिए झांसे में आया परिवार
मिली जानकारी के अनुसार, तारबाहर थाना क्षेत्र के विनोबा नगर निवासी छात्रा ऋषिका तिवारी और उनके परिजन कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी के लिए गूगल पर सर्च कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक अज्ञात मोबाइल नंबर मिला। संपर्क करने पर फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को एडमिशन प्रक्रिया का एजेंट बताया और परिवार को भरोसा दिलाया कि वह छात्रा का प्रवेश आसानी से करा देगा।
‘शॉर्ट एग्जाम’ और डोनेशन के नाम पर ऐंठे रुपये
आरोपी ने परिजनों को झांसा दिया कि छात्रा का एक ‘शॉर्ट एग्जाम’ कराया जाएगा, जिसके माध्यम से IIT हैदराबाद में सीधे एडमिशन मिल जाएगा। इसके बाद डोनेशन और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर आरोपी ने अलग-अलग किश्तों में बैंक खातों में कुल 12 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
एडमिशन न मिलने पर हुआ ठगी का अहसास
काफी समय बीत जाने के बाद भी जब एडमिशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो परिजनों को संदेह हुआ। उन्होंने आरोपी से अपनी राशि वापस मांगी, लेकिन उसने इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने तारबाहर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में जुटी, साइबर सेल की मदद
तारबाहर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की डिटेल्स जुटाकर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एडमिशन ठगी से बचाव के लिए सावधानियां:
- आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें: प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट (.ac.in या .edu.in) का ही उपयोग करें।
- अज्ञात नंबरों से बचें: गूगल सर्च में मिलने वाले किसी भी अनपेक्षित नंबर या एजेंट पर बिना सत्यापन के विश्वास न करें।
- व्यक्तिगत खातों में पैसे न भेजें: किसी भी संस्थान का शुल्क हमेशा उनके आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से जमा करें, किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते में नहीं।
- तत्काल शिकायत दर्ज कराएं: साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें।



