रायपुर। रातों-रात अमीर बनने, गड़ा धन हासिल करने या तंत्र-मंत्र के जरिए अलौकिक शक्तियां पाने की चाह आज भी कई लोगों को अंधविश्वास की गिरफ्त में धकेल रही है। इसका खामियाजा केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मामलों में लोगों की जान भी चली जा रही है। छत्तीसगढ़ में बीते कुछ वर्षों के दौरान सामने आए कई सनसनीखेज मामलों ने यह साबित किया है कि अंधविश्वास और कथित तांत्रिकों के झांसे में आकर लोग हत्या, आत्महत्या और ठगी जैसी गंभीर घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार जादू-टोना और अंधविश्वास से जुड़ी घटनाओं में छत्तीसगढ़ देश के सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल है। वर्ष 2024 में प्रदेश में ऐसे 10 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2021 से 2025 के बीच जादू-टोना और अंधविश्वास से जुड़े मामलों में करीब 83 लोगों की मौत दर्ज की गई। इन आंकड़ों के आधार पर छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है।
एक गांव में लगातार आठ मौतों ने मचाई थी सनसनी
बलौदाबाजार जिले के खरवे गांव में फरवरी से मई 2026 के बीच लगातार आठ ग्रामीणों की संदिग्ध मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। एक के बाद एक हुई मौतों के बाद ग्रामीणों ने पुलिस से जांच की मांग की। विवेचना के दौरान पुलिस ने एक कथित तांत्रिक को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि गड़े धन की चाह और निजी रंजिश के चलते लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। इस मामले ने अंधविश्वास के खतरनाक प्रभाव को उजागर कर दिया।
तांत्रिक साधना के नाम पर चली गई जान
बिलासपुर जिले के जोंधरा गांव में अप्रैल 2026 में एक व्यक्ति की मौत भी अंधविश्वास से जुड़ी बताई गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कथित तांत्रिक साधना के दौरान उसने स्वयं को गंभीर रूप से घायल कर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना ने यह सवाल खड़ा किया कि बिना वैज्ञानिक सोच के फैल रहे अंधविश्वास किस तरह लोगों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं।
ढाई करोड़ रुपये बनाने के झांसे में तीन लोगों की हत्या
कोरबा जिले में जनवरी 2026 में तीन लोगों की हत्या का मामला भी कथित तंत्र-मंत्र और धन दोगुना करने के लालच से जुड़ा था। जांच में सामने आया कि एक कथित तांत्रिक ने लाखों रुपये को कई गुना बढ़ाने का दावा कर लोगों को अपने जाल में फंसाया। बाद में तीनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
कानून सख्त, फिर भी जारी है अंधविश्वास का कारोबार
विशेषज्ञों का मानना है कि अशिक्षा, लालच और अंधविश्वास के कारण ऐसे अपराध लगातार सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 लागू है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को टोनही या डायन बताकर प्रताड़ित करना, झाड़-फूंक के नाम पर ठगी करना या डराना दंडनीय अपराध है। इसके अलावा हत्या, धोखाधड़ी, अपहरण और मानव बलि जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराएं लागू होती हैं, जिनमें उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंधविश्वास के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना, शिक्षा का प्रसार और जागरूकता अभियान चलाना भी उतना ही जरूरी है। जब तक समाज तंत्र-मंत्र और चमत्कार के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम से बाहर नहीं निकलेगा, तब तक ऐसे अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना रहेगा।



