सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के भाई और बस्तर के पूर्व सांसद दिनेश कश्यप बनें बस्तर जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष
पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपाद)
रायपुर. अपेक्स के भष्ट्र अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह और भारत सरकार की नीतियों के विरुद्ध सहकारिता और सहकारी बैंकों के स्ट्रक्चर को गुपचुप तरीके से बदलने की तैयारियां पूरी कर ली थी। पंरतु राज्य सरकार ने जिला सहकारी बैंकों में जनप्रतिनिधियों की नियुक्ति कर इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

अपेक्स के अधिकारियों ने त्रिस्तरीय व्यवस्था से द्विस्तरीय संरचना की तैयारी पूरी कर ली थी। जिसमें जिला सहकारी बैंकों का विलय अपेक्स में करने और सभी सहकारी समितियों में सीधे नियंत्रण का प्रावधान किया गया था। जिससे सहकारिता और सहकारी बैंकों का पूरा तंत्र नष्ट हो जाता। साथ ही ना सिर्फ भष्ट्राचार को बढ़ावा मिलता बल्कि कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सहित कृषकों की अत्यंत ही दयनीय स्थिति हो जाती।
शासन द्वारा जारी इस आदेश से राज्य में सभी जिला सहकारी बैंकों में लंबे समय से लागू कलेक्टर प्रणाली को समाप्त करते हुए जनप्रतिनिधियों की वापसी करा दी है। सहकारिता विभाग द्वारा राज्य के पांच जिला सहकारी बैंकों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। विधानसभा चुनाव 2023 से इन बैंकों का संचालन कलेक्टरों को प्राधिकृत अधिकारी बनाकर किया जा रहा था।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार रायपुर जिला सहकारी बैंक में अध्यक्ष के रूप में धमतरी कुरूद के निरंजन सिन्हा और उपाध्यक्ष के रूप में राजधानी रायपुर के अनिमेष कश्यप ( बाॅबी ) की नियुक्ति की गई है। वहीं जगदलपुर जिला सहकारी बैंक में पूर्व सांसद और मंत्री केदार कश्यप के भाई दिनेश कश्यप को अध्यक्ष तथा श्रीनिवास मिश्रा को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

बिलासपुर जिला सहकारी बैंक में बेलतरा से पूर्व विधायक रजनीश सिंह को अध्यक्ष और रजनी साहू को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजनांदगांव बैंक में सचिन सिंह बघेल अध्यक्ष तथा भाजपा के पूर्व महामंत्री भरत वर्मा उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।दुर्ग जिला सहकारी बैंक की कमान प्रीतपाल बेलचंदन को अध्यक्ष और नरेश यदु को उपाध्यक्ष के रूप में सौंपी गई है। अंबिकापुर बैंक में रामकिशुन सिंह अध्यक्ष और जगदीश साहू उपाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं।
गौरतलब है कि सरकार गठन के बाद से इन सहकारी बैंकों का संचालन कलेक्टरों की अध्यक्षता में किया जा रहा था। राजनैतिक हलकों में अब इन राजनैतिक नियुक्तियों से सहकारी संस्थाओं में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सहकारिता सहित सहकारी बैंकों की फिर एक बार मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।



