पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
रायपुर/छत्तीसगढ़. वर्ष 2024 में 10वीं बोर्ड परीक्षा में 3 लाख 40 हजार 220 विद्यार्थी रजिस्टर्ड हुए और 2 लाख 57 हजार 72 विद्यार्थी सफल रहे या आप कह सकते हैं पास हुए। वहीं वर्ष 2026 की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 2 लाख 46 हजार 166 विद्यार्थियों ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया एवं पास होने वाले छात्रों की कुल संख्या सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 2 लाख 2 हज़ार 549 रहीं यानी 2024 में 10वीं में 83 हजार 148 छात्र फेल हो गए थे और 2026 में 12वीं कक्षा की परीक्षा में 94 हज़ार 54 छात्रों ने भाग ही नहीं लिया इसके मायने 10 हजार 906 छात्रों ने 10वीं कक्षा की परीक्षा में पास होने के बाद भी 12वीं कक्षा की परीक्षा नहीं दी। क्या ये 94 हज़ार छात्रों ने 2024 के बाद पढ़ाई छोड़ दी ? आंकड़े तो यही बताते हैं।
अगर बोर्ड परीक्षा के अन्य वर्षों की तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 3 लाख 30 हजार 601 विद्यार्थी रजिस्टर्ड हुए, जिनमें से 2 लाख 47 हजार 721 विद्यार्थी सफल रहे या कहें पास हुए। इसके दो साल बाद यानी 2025 की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कुल 2 लाख 40 हजार 422 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। जिसमें पास होने वाले छात्रों की संख्या 1 लाख 94 हज़ार 906 है। मायने 2023 में 82 हज़ार 880 स्कूली छात्र फेल हो गए थे और 2025 में 12वीं की परीक्षा में 90 हजार 179 छात्रों ने भाग ही नहीं लिया मायने 7 हजार 299 विधार्थी 10वीं कक्षा की परीक्षा पास होने के बाद भी 12वीं कक्षा की परीक्षा नहीं दी। क्या 90 हजार 179 स्कूली छात्रों ने 2024 में पढ़ाई छोड़ दी ?
अब बात करते हैं अन्य आंकड़ों की – 10वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा में वर्ष 2023 में 3 लाख 30 हज़ार 601, वर्ष 2024 में 3 लाख 40 हज़ार 220 और वर्ष 2025 में 3 लाख 28 हज़ार 716 यानी औसतन पिछले तीन वर्षों में 3 लाख 33 हजार छात्र परीक्षा में रजिस्टर्ड हुए। वहीं 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में वर्ष 2024 में 2 लाख 54 हज़ार 906, वर्ष 2025 में 2 लाख 40 हज़ार 422 और वर्ष 2026 में 2 लाख 46 हज़ार 166 स्कूली छात्रों जिसके मायने हैं कि औसतन 2 लाख 47 हजार छात्र पिछले तीन वर्षों में परीक्षा के लिए रजिस्टर्ड किए गए थे। अब पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो औसतन 86 हज़ार स्कूली विद्यार्थियों ने प्रतिवर्ष 10वीं के बाद 12वीं की परीक्षाओं में भाग ही नहीं ले रहे हैं।
क्या इन आंकड़ों से सीधे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता कि ये सभी विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ चुके हैं ? या इनमें से कई विद्यार्थी दूसरे शिक्षा बोर्ड या अन्य पाठ्यक्रमों की ओर भी गए हो सकते हैं ? पंरतु क्या C.G. BORD के विधार्थी CBSE SYLLABUS या ICSE SYLLABUS या देश के अन्य राज्यों की बोर्ड परीक्षा में बैठने और पास होने का माद्दा रखते हैं ? ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इस अंतर की वास्तविक वजह क्या है?
छत्तीसगढ़ में ड्राप आउट होने के मुख्य कारण का यदि विश्लेषण किया जायें तो कुछ कारण स्पष्ट तौर पर दिखाई देते हैं जैसे
1.आर्थिक तंगी : शिक्षा का खर्च न उठा पाना या परिवार की मदद के लिए काम करना शुरू करना।
2.पारिवारिक परेशानियां : घर में समस्याओं के कारण पढ़ाई पर ध्यान न दे पाना।
3.अकादमिक दबाव: पढ़ाई में पिछड़ जाना या परीक्षाओं के तनाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता।
4.स्वास्थ्य या अन्य कारण : खराब स्वास्थ्य या अन्य व्यक्तिगत मजबूरियां।
वहीं अगर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 56 हजार 895 स्कूल हैं। जिसमें पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में 51 लाख 67 हजार 357 छात्र शिक्षारत हैं, जबकि इन सभी स्कूलों में कुल शिक्षकों की संख्या 1 लाख 78 हजार 731 है। यानी सभी स्कूलों में औसतन 29 विद्यार्थीयों पर 1 शिक्षक और 1 स्कूल पर करीब 91 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है।
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फ़िलहाल 10वीं-12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के आंकड़ों में दिख रहा यह अंतर कई सवाल खड़े करता है। क्या यह शिक्षा का बदलता रुझान है या फिर राज्य सरकार के लिए ड्रॉपआउट की चुनौती है ? इसकी स्पष्ट तस्वीर तभी सामने आएगी या आ सकेगी जब राज्य का शिक्षा विभाग यह बताएगा कि 10वीं कक्षा के बाद कितने विद्यार्थी वैकल्पिक शिक्षा में चलें गए और कितने विधार्थी वास्तव में 10वीं-12वीं की नियमित स्कूली शिक्षा से बाहर हो गए।
अब बात करते हैं है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान सरकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार कर रही पंरतु वहीं आये दिन प्रदेश के विभिन्न इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों द्वारा शराबखोरी की आती खबरें और वायरल होते विडियो शर्मनाक और राज्यभर के शिक्षकों के माथे में कलंक लगा रहे हैं। शिक्षकों द्वारा लगातार स्कूलों में शराब पीकर आना या स्कूलों में ही शराब का सेवन करतीं हुई लगातार बढ़ रही घटनाएं ऐसी है जो अंत्यंत ही चिंताजनक है।
छत्तीसगढ़ शासन के नवाचार क्या स्कूली शिक्षा में कोई सुधार कर पायेंगे?
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए आगामी शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था देश के अन्य प्रमुख शिक्षा बोर्डों की तर्ज पर लागू की जाएगी। वर्तमान में राज्य में स्कूलों का शैक्षणिक सत्र 16 जून से 30 अप्रैल तक संचालित होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह सत्र समाप्त कर दिया जाएगा और प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक शिक्षा सत्र चलेगा।
हालांकि विद्यार्थियों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह 1 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां जारी रहेंगी। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020), निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 तथा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।
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आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में कक्षा पहली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी गई है। जारी निर्देशों के अनुसार बच्चों के फाउंडेशनल स्टेज को मजबूत बनाने और प्राथमिक स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए संबंधित शैक्षणिक सत्र की 1 अप्रैल को बच्चे की आयु के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।



