Gold Price Crash : सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों और दिवाली पर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों का ध्यान खींचा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव अपने रिकॉर्ड स्तर से 38,000 रुपये से ज्यादा नीचे आ चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सोना खरीदने का यह सही मौका है या दिवाली 2026 से पहले कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल सकती है?
बाजार में सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों और निवेशकों की खरीद-बिक्री का असर पड़ रहा है। रिकॉर्ड तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली को भी कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है।
रिकॉर्ड हाई से 38,755 रुपये नीचे आया सोना
उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, MCX पर सोने का भाव 29 जनवरी 2026 को 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा था। इसके बाद कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हुआ। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में गोल्ड फ्यूचर्स का भाव घटकर 1,42,024 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। (Gold Price Crash)
इस तरह सोना अपने रिकॉर्ड हाई से 38,755 रुपये यानी करीब 21.43 प्रतिशत नीचे आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, एक सप्ताह के दौरान सोने के भाव में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे चली गई। चांदी की कीमतों में भी कमजोरी रही।
सोने की कीमतों में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली
जब किसी निवेश की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो निवेशक मुनाफा कमाने के लिए उसे बेचने लगते हैं। सोने में रिकॉर्ड तेजी के बाद भी ऐसा ही दबाव देखने को मिला। बड़े पैमाने पर बिकवाली होने से कीमतों में गिरावट आ सकती है।
2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत आमतौर पर डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा पड़ सकता है। इससे मांग प्रभावित हो सकती है और सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
3. ब्याज दरों और महंगाई की चिंता
अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भी सोने के भाव को प्रभावित करती हैं। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के माहौल में कुछ निवेशक दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी महंगाई और मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है।
4. वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव
शेयर बाजारों में कमजोरी और निवेशकों की नकदी संबंधी जरूरतों के कारण कई बार सोने समेत दूसरी परिसंपत्तियों में भी बिकवाली बढ़ जाती है। हालांकि, कीमतों पर इसका असर बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करता है।
क्या दिवाली 2026 से पहले फिर महंगा होगा सोना?
दिवाली से पहले सोने की कीमतों में तेजी लौटेगी या गिरावट जारी रहेगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। बाजार विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक, MCX पर 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, यदि सोने का भाव इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तो इसमें रिकवरी आ सकती है और कीमतें 1,48,000 से 1,52,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। इसके विपरीत, यदि भाव 1,40,000 रुपये के नीचे फिसलता है, तो 1,36,000 से 1,38,000 रुपये के स्तर तक गिरावट की आशंका भी जताई गई है।
ये संभावित बाजार स्तर हैं, निश्चित लक्ष्य या गारंटी नहीं। वास्तविक कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों और अन्य आर्थिक घटनाक्रमों के अनुसार बदल सकती हैं।
क्या अभी सोना खरीदना फायदेमंद रहेगा?
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आने के बाद खरीदारी पर विचार किया जा सकता है, लेकिन केवल रिकॉर्ड हाई से भाव नीचे आने को खरीदारी का पक्का संकेत नहीं मानना चाहिए। निवेश करने या गहने खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
- गहने खरीदने वाले: खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के ताजा भाव की तुलना करें।
- मेकिंग चार्ज: गहनों की कुल कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू कर भी शामिल होते हैं, इसलिए केवल सोने के भाव पर फैसला न लें।
- निवेशक: एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि पर विचार करें।
- बाजार पर नजर: डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में बदलाव पर ध्यान दें।
निष्कर्ष: सोना रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है, लेकिन दिवाली 2026 तक कीमतों की दिशा वैश्विक बाजार के संकेतों पर निर्भर करेगी। खरीदारी का फैसला अपनी जरूरत, बजट और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करें। (Gold Price Crash)




