नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने, जल संरक्षण, टेलीमेडिसिन और मस्तिष्क अनुसंधान जैसे विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के 12 साल पूरे होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह देश के आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को करीब से जानने का अवसर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर शुरू हुआ यह सफर लगातार जारी है। इस दौरान देशवासी उनके सहयात्री और मार्गदर्शक बने हैं। उन्होंने कार्यक्रम को आम नागरिकों के योगदान और उपलब्धियों को सम्मान देने का माध्यम बताया।
पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा
पीएम मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की संस्था जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को नया जीवन देने के लिए काम कर रही है। इस पहल को ‘नव-त्रिंजन’ नाम दिया गया है।
इस अभियान के तहत बिना रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के जैविक कपास उगाने पर जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से धागे और कपड़े तैयार किए जाते हैं, जिससे उन्हें रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की जरूरत कम हो सकती है। प्रधानमंत्री ने ऐसे प्रयासों को पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को मिला नया जीवन
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर संरक्षण अभियान शुरू किया।
इस अभियान में वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर बढ़ाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे उपाय किए गए। पीएम मोदी के मुताबिक, इन प्रयासों से हेवल नदी को पुनर्जीवित करने में मदद मिली और आसपास के कई प्राकृतिक जल स्रोत भी फिर से बहाल हुए। उन्होंने इसे जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।
‘वोकल फॉर लोकल’ से विदेशी बाजारों तक पहुंच रहे भारतीय उत्पाद
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान दिला रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल को मालदीव में बाजार मिल रहा है।
उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों का भी उल्लेख किया। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है।
पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों के सामान को प्राथमिकता दें। इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
e-Sanjeevani से दूरदराज के मरीजों को मिली विशेषज्ञ सलाह
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को बताते हुए अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के उदाहरण साझा किए।
उन्होंने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने का जिक्र किया, जिसे तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने e-Sanjeevani के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया। बच्चे को निमोनिया होने का पता चला और विशेषज्ञ की निगरानी में उसका इलाज शुरू होने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
इसी तरह, लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ने पर स्थानीय चिकित्सा दल ने कवरत्ती में मौजूद अनुभवी डॉक्टरों से e-Sanjeevani के जरिए सलाह ली। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से मरीज को उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिली।
प्रधानमंत्री ने इन उदाहरणों के माध्यम से बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह पहुंचाने में उपयोगी साबित हो रही हैं।
IIT मद्रास में ब्रेन रिसर्च सेंटर का उल्लेख
पीएम मोदी ने ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का भी जिक्र किया, जिसका उद्घाटन उन्होंने IIT मद्रास में किया था। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने के लिए ब्रेन इमेजिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है।
इस परियोजना का उद्देश्य मानव मस्तिष्क की संरचना का विस्तार से अध्ययन करना है। इसके तहत आने वाले समय में 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग कर उनका बारीकी से विश्लेषण करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने इसे विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया।
आम लोगों के प्रयासों को सम्मान देने का माध्यम है ‘मन की बात’
कार्यक्रम के समापन संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ के जरिए उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और आम नागरिकों के योगदान को जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, स्थानीय उत्पादों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से जनभागीदारी की अहमियत पर जोर दिया।




