दुर्ग। संदिग्ध परिवहन के खिलाफ चल रही पुलिस की कार्रवाई में दुर्ग जिले में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा में वाहन जांच के दौरान पुलिस ने एक बोलेरो मैक्स पिकअप से चार करोड़ रुपये नकद बरामद किए। रकम वाहन के पिछले हिस्से में बनाए गए गुप्त चेंबर में छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने वाहन में सवार दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर दुर्ग पुलिस संदिग्ध वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि एक पिकअप में बड़ी मात्रा में नकदी रायपुर से नागपुर की ओर ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने डबरापारा के पास नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की।
मॉडिफाइड हिस्से में बनाया था गुप्त चेंबर
रात करीब 11 बजे पुलिस ने सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप CG 04 QU 5996 को रोककर तलाशी ली। वाहन के पिछले हिस्से में किए गए असामान्य मॉडिफिकेशन को देखकर पुलिस को संदेह हुआ। सघन जांच के दौरान वहां एक विशेष रूप से बनाया गया गुप्त चेंबर मिला।
चेंबर को खोलने पर पुलिस को उसमें बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा दिखाई दी। गिनती के बाद बरामद रकम करीब 4 करोड़ रुपये बताई गई। इतनी बड़ी रकम छिपाकर ले जाने के कारण पुलिस ने वाहन और नकदी को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।
दो लोग वाहन में सवार थे
पुलिस के मुताबिक, पिकअप में दो लोग मौजूद थे। उनकी पहचान भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे के रूप में हुई है। इनमें भवेशभाई वाहन चला रहा था। दोनों से पुलिस नकदी के स्रोत, मालिकाना हक और रकम को रायपुर से नागपुर ले जाने के उद्देश्य को लेकर पूछताछ कर रही है।
प्रारंभिक जानकारी में दोनों के ओडिशा या अन्य किसी स्थान से रकम लाने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किस व्यक्ति या संस्था की है और इसके परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
हवाला कनेक्शन की आशंका, जांच जारी
करोड़ों रुपये नकद मिलने और उसे वाहन के गुप्त चेंबर में छिपाकर ले जाने के कारण हवाला कारोबार से जुड़े होने की आशंका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, पुलिस ने अभी इसे हवाला की रकम होने की पुष्टि नहीं की है। केवल नकदी बरामद होने के आधार पर इसके स्रोत को अवैध मानना जल्दबाजी होगी।
पुलिस ने मामले की वित्तीय जांच के लिए आयकर विभाग को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगे की जांच में रकम के स्रोत, वास्तविक मालिक और उसके इस्तेमाल से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
फिलहाल पुलिस दोनों व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है। आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चार करोड़ रुपये किसके हैं और इसे गुप्त तरीके से नागपुर ले जाने के पीछे क्या उद्देश्य था।




