
12 सूत्रीय राजनीतिक प्रस्ताव
1. हसदेव और बैलाडीला में खनन पर रोक- हसदेव अरण्य, परसा ईस्ट-केते बासन, केते एक्सटेंशन सहित नई कोयला खदानों और बैलाडीला में आयरन ओर खनन के लिए दी गई अनुमति रद्द की जाए।
- हसदेव की 1,742 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को निरस्त किया जाए।
- अनुसूचित जनजाति (ST) को जनसंख्या के अनुपात में 32 प्रतिशत आरक्षण मिले।
- राजभवन में लंबित आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी की जाए।
- Forest Rights Act के तहत पात्र आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे आवंटित किए जाएं।
- पलायन कर चुके आदिवासियों को वापस बसाया जाए।
- नक्सल हिंसा और कथित फर्जी मुठभेड़ों से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
- नक्सली सहयोगी बताकर जेल भेजे गए निर्दोष आदिवासियों को रिहा किया जाए।
- 25 हजार से अधिक आदिवासियों के खिलाफ जारी स्थायी और अस्थायी वारंट रद्द किए जाएं।
- संविधान की पांचवीं अनुसूची, ग्राम सभा की सर्वोच्चता, पेसा कानून और वन अधिकार कानून का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
- समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखा जाए।
- उनकी पारंपरिक विवाह, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं की रक्षा की जाए।
- सरकारी नौकरियों और स्थानीय भर्ती में आदिवासियों को प्राथमिकता और आरक्षण मिले।
- बस्तर और सरगुजा के बंद स्कूलों को खोलकर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की जाए।
- अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण या परियोजनाएं लागू न हों।
- PESA Act और पंचायत राज अधिनियम का शत-प्रतिशत पालन हो।
- आदिवासियों के विशेष संवैधानिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की जाए।
- बाहरी हस्तक्षेप से जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना को बचाया जाए।
- आरएसएस और भाजपा द्वारा आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहे जाने का विरोध।
- आदिवासी पहचान को बनाए रखने की मांग।
- जनगणना 2026-27 में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान के लिए अलग कॉलम बनाया जाए।
- ताकि उनकी वास्तविक संख्या और पहचान दर्ज हो सके।

