रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की संभावित नियुक्ति को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। संगठन में बदलाव की अटकलों के बीच जहां कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं, वहीं इस मुद्दे ने भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी को भी जन्म दे दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर जारी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पिछले कई वर्षों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है और यह मुद्दा बार-बार चर्चा में आता है। मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अब जनता के बीच अपनी पकड़ खो चुकी है और संगठनात्मक स्तर पर गुटबाजी हावी है। उनके अनुसार, कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद ही उसकी कमजोर स्थिति का कारण हैं।
भाजपा मंत्री के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस एक संगठित और अनुशासित पार्टी है, जहां सभी निर्णय सामूहिक नेतृत्व के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है और सभी नेता पार्टी हित में मिलकर काम कर रहे हैं।
महंत ने यह भी कहा कि आने वाले समय में देश के कई राज्यों में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया चल रही है, और छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं रहेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष परिवर्तन को लेकर कोई तात्कालिक निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी नेतृत्व और आगामी कार्यक्रमों के बाद संगठनात्मक मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद-बीज की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति को लेकर सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर है। महंत के अनुसार, कई इलाकों में किसान अब भी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिस पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि बैठक में महंगाई, पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों सहित आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही विपक्षी दल आगे की रणनीति पर भी मंथन करेंगे।
कुल मिलाकर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर चल रही चर्चाओं ने छत्तीसगढ़ की सियासत को एक बार फिर सक्रिय कर दिया है और दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता दिख रहा है।