यक्ष प्रश्न
1.बैंक की रायगढ़-सरगुजा क्षेत्रों में पदस्थ रहे 100 करोड़ के गबन-घोटालो-फर्जीवाडो को अंजाम देने वाले अधिकारी-कर्मचारी संजय साहू, हेमंत चन्द्राकार और हेमंत चौहान पर एफआईआर कब दर्ज होगी ?
2.आडिट/अंकेक्षण के नाम पर एक व्यक्ति द्वारा वर्षों से की जा रही वित्तीय अनियमिताओं को कब और कैसे रोका जायेगा?
3.सैकडों करोड़ों की राशि जो गबन-घोटालो-फर्जीवाडो में हड़प ली गई है उसकी रिकवरी कैसे की जायेगी या कर ली गई है और उसकी बंदरबांट हो गई है ?
पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : 4 एवं 5 नवंबर 2024 को अपेक्स की बरमकेला ब्रांच में करोड़ों रुपयों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन किये गये। बरमकेला में शाखा प्रबंधक सहित बैंक कर्मियों द्वारा डीएमआर खातों में नियम विपरीत एवं संदिग्ध ट्रांजेक्शन व नकद आहरण करने और समितियों के केसीसी खातों को अनाधिकृत रूप से नामे कर IMPS ट्रांजेक्शन कर राशि का अंतरण कर करोड़ों रुपए का गबन किया गया। बैंक मुख्यालय में सतत् निगरानी के लिए एक आई. टी. विभाग भी है।
आई.टी. विभाग बैंक की सभी संचालित शाखाओं की प्रतिदिन के ट्रांजेक्शन की निगरानी करता है। इस विभाग के तात्कालिक हेड और कैडर आफिसर अविनाश श्रीवास्तव थे। उन्होंने या उनकी टीम ने संदिग्ध ट्रांजेक्शन को पकड़ा कैसे नहीं ? और पकड़ लिया था तो उसे लगातार होने क्यों दिया ?
रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल ने इस पूरे मामले की पहली रिपोर्ट 10 नवंबर 2024 को प्रसारित की थी। बरमकेला कांड के सामने आने के बाद तात्कालिक शाखा प्रबंधक डी.आर. बाघमारे, तात्कालिक लेखाधिकारी सुश्री मिनाक्षी मांझी और तात्कालिक लिपिक आशीष पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। संस्पेंशन लेटर के मुताबिक लेखाधिकारी मिनाक्षी मांझी की अनुपस्थिति में उनकी आई.डी.और पासवर्ड का उपयोग करके करोड़ों रूपए का गबन किया गया था। पंरतु उनकी आई डी और पासवर्ड का उपयोग क्यों किया गया ? क्या ये भी एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र था क्योंकि कोई भी बैंक कर्मचारी अपनी आईडी और पासवर्ड को कभी भी किसी अन्य कर्मी को नहीं देता है। क्या यह एक पूर्व नियोजित साजिश रची गई थी की जिस लेखाधिकारी को अवकाश में और अनुपस्थित बताया गया उसी की आईडी और पासवर्ड से खेल खेला गया या लेखाधिकारी मिनाक्षी मांझी द्वारा बैंक परिसर से बाहर से अपनी आईडी और पासवर्ड का उपयोग किया गया ?
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बैंक के वित्तीय लेनदेन करने वाले अधिकारियों के अवकाश की सूचना आईटी सेक्शन के पास पहुंचाई जाती है ताकि अवकाश में ये अधिकारी- कर्मचारी अपने आईं डी और पासवर्ड का उपयोग करें तो इसकी सतत् निगरानी की जा सके और जब लेखाधिकारी मिनाक्षी मांझी अवकाश पर थी और तब उनकी आईं डी और पासवर्ड का उपयोग किया जा रहा था तो ये अति महत्वपूर्ण विषय निगरानी डिपार्टमेंट से छूटा कैसे ? क्या आईं टी विभाग ने लेखाधिकारी से संपर्क किया और जानने का प्रयास किया ? या रची गई साजिश और वित्तीय षडयंत्र के सभी एक अभिन्न अंग थे ?
बरमकेला ब्रांच में हुई आर्थिक अनियमितता, कदाचार और करोड़ों की हेराफेरी की जांच के लिए आनन-फानन में एजीएम भूपेश चंद्रवंशी की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। इसके साथ ही रायगढ़ और सरगुजा क्षेत्रों की नौ अन्य ब्रांच की गड़बड़ी की आंशका में तीन अन्य जांच दलों का गठन भी किया गया है। एजीएम अरुण पुरोहित की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय टीम जशपुर, पत्थलगांव और सारंगढ़ ब्रांच, एजीएम एल.के.चौधरी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय टीम रायगढ़, खरसिया और पुसौर ब्रांच की और प्रबंधक अभिषेक तिवारी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय टीम कुनकुरी, लैलूंगा, और धरमजयगढ़ ब्रांच की जांच के लिए नियुक्त की गई थी। इन जांच टीमों को पंद्रह दिनों में अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यालय में प्रस्तुत करने निर्देशित किया गया था। सभी टीमों ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मुख्यालय में प्रस्तुत कर दी थी पंरतु सभी जांच दलों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया ताकि तात्कालिक रूप से अन्य शाखाओं में किए गए करोड़ों के गबन-घोटालो-फर्जीवाडो को सामने लाने से बचाया जा सके।
27 फरवरी 2025 को बरमकेला कांड के सभी आठों आरोपियों को नवा रायपुर स्थित मुख्यालय बुला कर गबन की गई राशि को जमा करने का आदेश दिया गया था। प्रबंध संचालक के.एन.कांडे ने आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों में से अरुण चंद्राकर को 19 लाख, खीरदास महंत को 3 लाख सहित बैंक के नियमित कर्मचारी आशीष पटेल को 9 लाख रुपए 3 मार्च 2025 तक मुख्यालय में जमा करने का मौखिक आदेश दिया था। सात आरोपियों से दिनभर पूछताछ के नाटक के बाद मुख्य आरोपी तात्कालिक शाखा प्रबंधक डी.आर.बाघमारे को देर शाम बुलाया गया और बंद कमरे में बातचीत की गई थी। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी और बैंक के उच्चतर प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार इन सभी से बातचीत के बाद बैंक से निकाले गए पैसों की वापसी सुनिश्चित कर ली गई थी। तो रकम वापसी और गबन-घोटालो-फर्जीवाडो की वसूली के बाद मिलें रुपयों को बैंक खातों में जमा किया गया था ?
इसके बाद अपेक्स के भ्रष्ट कैडर आफिसर ए.के श्रीवास्तव की 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्ति के बाद पुनः संविदा नियुक्ति की तैयारी की गई थी। एमडी कांडे ने प्रस्ताव तैयार कर पंजीयक, सहकारिता को अनुमोदन के लिए भी भेज दिया गया था। पंरतु आईएएस एवं तात्कालिक पंजीयक, सहकारिता कुलदीप शर्मा की नोटशीट में की गई क्वैरी ने एमडी कांडे की योजना को पलीता लगा दिया। इसके बाद भ्रष्ट अधिकारी ए.के. श्रीवास्तव और एस.के.जोशी को बतौर सलाहकार बैंक में नियुक्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई और इस पर प्रस्ताव और कानूनी प्रावधानों की प्रक्रिया के लिए प्रबंधक एल.के.चौधरी को निर्देश दिए गये थे। पंरतु रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल द्वारा खबर के प्रसारण के बाद सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई और किसी की भी नियुक्ति संविदा और सलाहकार के पद पर नहीं हो पाई।

इन सब मामलों के इतर बैंक के ही एक और लेखाधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री साय के क्षेत्र की बगीचा शाखा में 5 लाख रुपए बैंक चेस्ट से बगैर प्रबंधन की अनुमति के निकाल लिए गए। जो की पूरी तरह से डकैती थी। इस मामले में भी एम डी कांडे ने लेखाधिकारी पर अपराध पंजीबद्ध ना करा कर लीपापोती कर दी। कुल मिलाकर एम डी कांडे ने अपने कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपए की अफ़रा-तफ़री करा दी। फिलहाल उनका मुख्य मकसद अपना और अपने भ्रष्ट साथियों को बैंक के उच्चतर प्रबंधन में बतौर संविदा या सलाहकार के रूप में सेवानिवृत्ति के बाद भी बनाये रखना था। ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की बड़ी जांच और कार्यवाही से अपने और अपने साथियों को बचाया जा सके क्योंकि वैसे भी सेवानिवृत्ति के लिए अपेक्स बैंक और छत्तीसगढ़ के निरीह किसानों के करोड़ों रुपए तो इन सब ने मिलकर हजम कर लिये है।
यक्ष प्रश्न
कमल नारायण कांडे को जुलाई 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति के पूर्व अपेक्स के प्रबंध संचालक के पद से तत्काल हटाया जायेगा या कांडे के सभी कांडों को लीपापोती करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा ?



