कांकेर। मरकाबेड़ा-आदनार के जंगलों में विस्फोटक सामग्री को निष्क्रिय करने के दौरान हुए भीषण बम विस्फोट में डीआरजी के चार जवान—निरीक्षक सुखराम वट्टी, आरक्षक कृष्णा कोमरा, आरक्षक संजय गढ़पाले और आरक्षक परमानंद कोर्राम शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे जिले को गहरे शोक में डुबो दिया है।
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शहीद आरक्षक संजय गढ़पाले के पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम हराडूला में पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, डीआरजी के जवान और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने नम आंखों से वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि शहीद संजय गढ़पाले के घर में कुछ ही महीनों बाद शादी की तैयारियां शुरू होने वाली थीं। एक महीने पहले ही उनकी सगाई हुई थी और घर में खुशियों का माहौल था। लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने सारी खुशियां छीन लीं और घर में मातम छा गया।
शहीद के पिता ने बताया कि सगाई के तुरंत बाद ही संजय अपनी ड्यूटी पर लौट गया था। शनिवार को अचानक उन्हें फोन के जरिए बेटे के आईईडी विस्फोट में शहीद होने की खबर मिली, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
उन्होंने बताया कि संजय ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। अब उसके शहीद हो जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक चिंता भी खड़ी हो गई है।
इस घटना ने एक बार फिर उन जवानों के त्याग और बलिदान को सामने लाया है, जो देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। शहीद संजय गढ़पाले की अधूरी रह गई खुशियां और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।



