रायपुर। राजधानी के नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई और विस्थापित परिवारों के समर्थन में हुए प्रदर्शन के बाद बजरंग दल के भीतर विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बजरंग दल के रायपुर जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा को पद से हटा दिया है। संगठन ने उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है। वहीं, इस कार्रवाई के विरोध में कई कार्यकर्ताओं ने संगठन छोड़ने और नया संगठन बनाने की घोषणा की है।
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विजेंद्र वर्मा के अनुसार, 6 जुलाई को नकटी गांव के विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया था। प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन बेघर हुए परिवारों, मंदिरों को हुए नुकसान और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को उठाने के लिए किया गया था।
वर्मा का आरोप है कि नकटी गांव में प्रशासन की कार्रवाई के दौरान करीब 80 मकानों को तोड़ा गया। विस्थापित परिवारों को जिन स्थानों पर बसाया गया, वहां शुरुआती दिनों में भोजन, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रभावित लोगों के नए आवास छोटे होने के कारण बड़े परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं और रोजगार के स्थान से काफी दूरी पर होने से उनकी आजीविका भी प्रभावित हुई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान शीतला माता और भगवान शंकर के मंदिर भी प्रभावित हुए, जबकि उनका समुचित पुनर्स्थापन नहीं किया गया। इसके अलावा क्षेत्र के गोवंश को गौशाला भेजा गया, जहां कथित रूप से कुछ गायों की मौत होने की बात भी उन्होंने कही।
विजेंद्र वर्मा का कहना है कि प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रांत मंत्री की ओर से उन्हें व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से पदमुक्त किए जाने की सूचना मिली। उनका दावा है कि उन्हें कोई औपचारिक नोटिस या स्पष्टीकरण का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल उठाने के कारण उन्हें संगठनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
इस बीच, संगठन से जुड़े एक व्हाट्सऐप ग्रुप की चैट भी सामने आई है, जिसमें भाजपा नेताओं के खिलाफ नारों का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है। इस पर विजेंद्र वर्मा ने कहा कि यह कार्यकर्ताओं की नाराजगी की अभिव्यक्ति थी और उनका उद्देश्य हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों को उठाना था।
उधर, बजरंग दल के पूर्व उपाध्यक्ष योगेश सैनी ने भी स्वयं को पदमुक्त किए जाने की पुष्टि करते हुए संगठन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वे और उनके साथ जुड़े कार्यकर्ता भविष्य में भी हिंदुत्व और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर नए संगठन के गठन पर भी विचार करेंगे।



