रायपुर। राजधानी की सरकारी राशन दुकान से करीब 16 लाख रुपए के चावल के कथित गबन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जोरा वार्ड क्रमांक 51 की सरकारी राशन दुकान के संचालक टोपेश्वर साहू को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। खाद्य विभाग की जांच में ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड और दुकान में मौजूद वास्तविक चावल के स्टॉक के बीच भारी अंतर सामने आया है।
मामले की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हितग्राहियों की शिकायत से हुई थी। कई लोगों ने खाद्य विभाग को बताया कि उनका बायोमेट्रिक सत्यापन तो कराया गया, लेकिन उन्हें पीडीएस के तहत मिलने वाला चावल और शक्कर नहीं दिया गया।
जांच के दौरान आरोप सामने आया कि राशन दुकान संचालक ने हितग्राहियों के राशन कार्ड जमा कराए और ई-पॉस मशीन में राशन वितरण की एंट्री भी दर्ज कर दी, लेकिन संबंधित हितग्राहियों को खाद्यान्न नहीं दिया गया।
250 राशन कार्डों में मिली वितरण की एंट्री
खाद्य विभाग की जांच में करीब 250 राशन कार्डों पर राशन वितरण की एंट्री दर्ज मिली। हालांकि, संबंधित हितग्राहियों को चावल नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। प्रारंभिक जांच में करीब 81.07 क्विंटल चावल के गबन का मामला सामने आया।
इसके बाद दुकान के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ रिकॉर्ड और वास्तविक चावल के स्टॉक के बीच अंतर लगातार बढ़ता गया। बाद की जांच में चावल की कमी 389.24 क्विंटल, यानी करीब 778 बोरी तक पहुंच गई।
विभाग के अनुसार, इस कथित गबन और धोखाधड़ी से सरकार को करीब 15 लाख 91 हजार रुपए की वित्तीय हानि हुई है।
चावल की आवक का रिकॉर्ड, पावती नहीं
जांच में यह भी पाया गया कि 12 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच राशन दुकान में बड़ी मात्रा में चावल पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज था, लेकिन इसकी विधिवत पावती नहीं ली गई थी। निरीक्षण के दौरान दुकान में आवश्यक स्टॉक रजिस्टर और सूचना बोर्ड भी नहीं मिले।
विभाग ने इस संबंध में संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नवंबर 2025 में सरकारी राशन दुकान को निलंबित कर उसका संचालन दूसरी संस्था से जोड़ दिया गया।
खाद्य विभाग की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
खाद्य विभाग की जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने दुकान संचालक टोपेश्वर साहू के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित गबन किस तरह किया गया और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।
जांच एजेंसियां ई-पॉस मशीन में दर्ज वितरण, राशन कार्डों की एंट्री, चावल के आवक-जावक रिकॉर्ड और दुकान के वास्तविक स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।




