काठमांडू। नेपाल और तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा में अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। वहीं, चीन के सीमा क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
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बाढ़ के तेज बहाव में कई शहरों और गांवों के बड़े हिस्से प्रभावित हुए हैं। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए, जबकि कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं।
भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद या चट्टानों के खिसकने से अचानक बाढ़ की स्थिति बनी।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी में जलस्तर बढ़ने और चट्टानों के खिसकने से रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी नदी का पानी उफान पर आ गया। इसके बाद बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया।
तेज बहाव में बह गए पुल और वाहन
बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो में तेज रफ्तार से बहता कीचड़, चट्टानें और मलबा तबाही का मंजर दिखा रहे हैं। कई जगह पानी इमारतों और वाहनों को अपनी चपेट में लेता नजर आया।
एक वीडियो में चार मंजिला इमारत बाढ़ के तेज बहाव में बहती दिखाई दी। वहीं, रसुवा में एक कार पानी में बह गई। कई स्थानों पर पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर टूट गए।
करीब 100 लोगों को बचाया गया
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों से करीब 100 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने स्थिति का जायजा लेने के लिए आपात बैठक की। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।
133 भारतीय और 37 NRI लापता
अधिकारियों के मुताबिक, लापता लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 NRI शामिल हैं। इनमें करीब 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं।
गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन के अनुसार, उसके 77 सदस्य भी लापता हैं। संस्था के संस्थापक सद्गुरु ने बताया कि आव्रजन केंद्र में मौजूद लोगों के संबंध में अभी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि, उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं।
तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार, लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश, केरल समेत कई राज्यों ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
80 सुरक्षाकर्मी भी लापता
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग स्थानों पर करीब 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल हैं।
भारत ने मदद का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर इस प्राकृतिक आपदा पर दुख जताया और नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नेपाल में आई बाढ़ को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की और नेपाल से लगे संभावित प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन, राहत-बचाव दलों तथा NDRF को हाई अलर्ट पर रखने के निर्देश दिए।
भारत ने जारी की हेल्पलाइन
नेपाल में बाढ़ के बाद लापता भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों की मदद के लिए भारत सरकार ने हेल्पलाइन व्यवस्था शुरू की है। प्रभावित परिवार संबंधित हेल्पलाइन पर संपर्क कर नेपाल में मौजूद अपने परिजनों की जानकारी साझा कर सकते हैं।




