रायपुर। कांग्रेस की दिल्ली में प्रस्तावित बैठक से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है और पार्टी में कोई राजनीतिक स्पंदन नहीं बचा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बैज अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए “डूबते हुए आदमी” की तरह हाथ-पैर मार रहे हैं।
अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़े मुद्दों का अभाव है और वह छोटे-छोटे मामलों को बेवजह बड़ा बनाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वास्तविक जनहित के मुद्दों से पूरी तरह भटक चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के E20 फ्यूल को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्राकर ने कहा कि वे अखबार पढ़कर मुद्दों पर बयान देते हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को इस विषय में न्यायालय से अनुमति मिल चुकी है। उनके अनुसार, कांग्रेस का राष्ट्रीय महत्व के विषयों से कोई सरोकार नहीं है और पार्टी केवल एक परिवार की राजनीति तक सीमित हो गई है।
भोरमदेव मंदिर में पूजा-अर्चना को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों पर चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती है और उसकी सोच सनातन विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मुद्दों को भी कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है।
राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में भाजपा के 111 कार्यकर्ताओं के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक मंडल तक सीमित था, लेकिन कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस “तिल का ताड़” बनाने की राजनीति कर रही है क्योंकि उसके पास जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे नहीं हैं।
कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि पार्टी जनकल्याण के एजेंडे से पूरी तरह दूर हो चुकी है। उन्होंने कांग्रेस को आत्ममुग्ध पार्टी बताते हुए तंज कसा कि उसके नेताओं को अब अपना-अपना राजनीतिक ठिकाना तलाश लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई तेलंगाना जाए, कोई कर्नाटक में रोजगार ढूंढे, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का भविष्य नहीं है।
कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन और कार्यक्रमों को लेकर जारी किए गए आंतरिक पत्र पर भी चंद्राकर ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं पर “इमरजेंसी” लगा दी है। उनके मुताबिक पार्टी के केवल तीन-चार नेता ही प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, जबकि बाकी नेताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक दल में इस तरह की व्यवस्था उचित नहीं मानी जा सकती।



