Anti Paper Leak Amendment Bill : देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लोकसभा ने बुधवार को ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्ष की भारी नारेबाजी और हंगामे के बीच यह विधेयक निचले सदन से पास हुआ।
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विपक्ष का हंगामा और सदन की कार्यवाही
विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने के आरोपों को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की। हालांकि, इस राजनीतिक गहमागहमी के बावजूद सरकार ने बिल को सदन के पटल पर रखा, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान: एक नज़र में
कड़े दंड का प्रावधान: परीक्षा का पेपर लीक करने या धांधली में शामिल पाए जाने पर सजा की अवधि को 5 साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल की जेल कर दिया गया है। साथ ही ₹50 लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।
संगठित अपराध पर शिकंजा: संगठित पेपर लीक गिरोहों और माफियाओं के लिए अधिकतम जुर्माने की राशि को बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है।
समयबद्ध जांच: नए संशोधनों के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच पूरी करने के लिए 2 महीने की समय-सीमा तय की गई है।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट: मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए 3 महीने के भीतर फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने का प्रस्ताव शामिल है।
NEET विवाद के बाद बैकफुट पर आई सरकार का सख्त कदम
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने यह विधेयक हाल ही में NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में हुए उग्र छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद पेश किया है। इस विवाद के कारण तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने और नकल माफिया के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संगठित गिरोह की वजह से ईमानदार और मेधावी छात्रों का भविष्य बर्बाद न हो।



