रायपुर, 02 जुलाई। Nakti Village Eviction : नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए प्रस्तावित भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कई परिवारों का आशियाना उजड़ गया। अब इन परिवारों के सामने सिर्फ पुनर्वास की चुनौती ही नहीं, बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा बचाने की बड़ी चिंता भी खड़ी हो गई है।
विस्थापित परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 में आवास तो आवंटित कर दिए गए हैं, लेकिन वहां आसपास कोई प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित होने लगी है।
नए ठिकाने पर स्कूल नहीं, निजी स्कूलों की फीस बनी परेशानी
विस्थापित परिवारों का कहना है कि उनके कई बच्चे पहले निजी स्कूलों में पढ़ते थे, लेकिन नए क्षेत्र में मौजूद निजी स्कूलों की फीस इतनी अधिक है कि उसे वहन करना उनके लिए संभव नहीं है। दूसरी ओर, सरकारी प्राथमिक विद्यालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होने से अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अभी तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई गई है।
बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि आयोग की एक विशेष टीम जल्द ही विस्थापित क्षेत्र का दौरा करेगी और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विस्थापन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो आयोग आवश्यक कार्रवाई और प्रशासन को जरूरी निर्देश देने से पीछे नहीं हटेगा।
‘किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होगी’
राज्य बाल संरक्षण आयोग ने विस्थापित परिवारों को भरोसा दिलाया है कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार से कोई समझौता नहीं होगा। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ऐसे कदम उठाए जाएंगे जिससे बच्चों की पढ़ाई जल्द से जल्द सामान्य हो सके। इस आश्वासन के बाद विस्थापित परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कुछ उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अब सभी की निगाहें प्रशासन और आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



