Chanakyaniti : हर मुस्कुराता चेहरा आपका शुभचिंतक हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार धोखा दुश्मन से नहीं, बल्कि उस व्यक्ति से मिलता है जिसे हम अपना करीबी दोस्त समझते हैं। चाणक्य नीति (Chanakyaniti) में भी ऐसे लोगों से सावधान रहने की सीख दी गई है, जो सामने मीठी बातें करते हैं, लेकिन पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
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ऐसे में जरूरी है कि दोस्ती में सिर्फ बातों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और उसके कर्मों पर भी ध्यान दिया जाए। आइए जानते हैं नकली या मतलबी दोस्त की पहचान करने के कुछ संकेत।
जरूरत से ज्यादा तारीफ करना
जो व्यक्ति हर बात में आपकी हां में हां मिलाए और आपकी किसी गलती पर भी आपको न टोके, उससे थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। सच्चा दोस्त आपकी तारीफ करने के साथ-साथ आपकी गलतियों के बारे में भी ईमानदारी से बताता है। वहीं, जो व्यक्ति दूसरों के सामने उनके राज और कमजोरियां उजागर करता है, वह आपकी निजी बातें भी दूसरों तक पहुंचा सकता है।
आपकी सफलता से खुश न होना
मुश्किल समय में साथ देना दोस्ती का एक पहलू है, लेकिन आपकी सफलता पर दिल से खुश होना भी सच्चे रिश्ते की पहचान है। अगर आपकी तरक्की के बाद किसी दोस्त के व्यवहार में जलन या नाराजगी नजर आने लगे, तो रिश्ते को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
हर नई कोशिश में हतोत्साहित करना
अगर कोई दोस्त आपकी हर नई कोशिश पर यह कहकर रोकता है कि ‘तुमसे नहीं होगा’, तो उसकी बातों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। सही सलाह और लगातार हतोत्साहित करने के बीच अंतर समझना जरूरी है। सच्चा दोस्त जोखिम से आगाह कर सकता है, लेकिन आपका आत्मविश्वास नहीं तोड़ता।
सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करना
जो व्यक्ति आपकी जरूरत के समय गायब हो जाए, लेकिन अपना काम पड़ने पर तुरंत आपको याद करे, उसके व्यवहार पर गौर करना चाहिए। दोस्ती सिर्फ मतलब निकलने तक सीमित हो, तो यह रिश्ता स्वार्थ पर आधारित हो सकता है।
आपकी निजी बातों का इस्तेमाल करना
दोस्ती में लोग अपनी कमजोरियां और निजी बातें साझा करते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के सामने अपनी व्यक्तिगत जानकारी या कमजोरियां बताना सही नहीं है। समय के साथ रिश्ते बदल सकते हैं और आपकी कही बातें कभी-कभी आपके खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं।
सफलता के साथ बदल जाए व्यवहार
किसी व्यक्ति का असली व्यवहार कई बार तब सामने आता है जब आप जीवन में आगे बढ़ने लगते हैं। अगर आपकी सफलता के बाद दोस्त का व्यवहार बदल जाए, दूरी बढ़ने लगे या वह लगातार आपको नीचा दिखाने की कोशिश करे, तो ऐसे रिश्ते को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
चाणक्य नीति की सीख
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति पर शक किया जाए। चाणक्य नीति की सीख का मूल भाव यही है कि भरोसा करें, लेकिन सोच-समझकर और परखने के बाद। सच्चा दोस्त वह होता है जो आपकी सफलता से खुश हो, आपकी गलतियों पर आपको सही सलाह दे और मुश्किल समय में बिना स्वार्थ के आपके साथ खड़ा रहे।
इसलिए किसी व्यक्ति की सिर्फ बातों पर नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और कर्मों पर ध्यान दें। समय के साथ लोगों की असलियत सामने आ जाती है। अपनी योजनाएं और निजी बातें सोच-समझकर साझा करें और सबसे जरूरी, दूसरों के भरोसे के साथ-साथ खुद पर भरोसा करना भी सीखें। (Chanakyaniti)




