रायपुर/जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक के बाद क्षेत्र के विकास को लेकर बड़ा रोडमैप सामने आया है। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में शाह ने कहा कि बस्तर में अब भय का माहौल समाप्त हो चुका है और पूरे क्षेत्र में उत्साह तथा विश्वास का वातावरण दिखाई दे रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव औरगृहमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे।
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गृह मंत्री ने कहा कि जब बस्तर के पिछले दशकों की स्थिति को देखा जाता है तो यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद रहा है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्से ऐसे भी थे जो बस्तर से अधिक पिछड़े थे, लेकिन वहां नक्सलवाद नहीं था। परिणामस्वरूप वे क्षेत्र विकास की मुख्यधारा में शामिल होते चले गए, जबकि बस्तर अपेक्षाकृत पीछे रह गया।
शाह ने कहा कि 19 मई 2026 को बस्तर के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समग्र विकास की नई परिकल्पना शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि नक्सल मुक्त होने के बाद बस्तर में स्थापित 200 कैंपों में से 70 कैंपों को “वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा। इन सेवा डेरों का उद्देश्य सरकारी सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाना होगा। यहां बैंकिंग सेवाएं, आधार कार्ड सुविधा, डिजिटल सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण, सस्ता राशन, प्राथमिक शिक्षा और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना है।
महिला सशक्तिकरण पर भी जोर देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि विकास प्रक्रिया में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तर की आदिवासी महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिसके तहत उन्हें गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही अगले छह महीनों में बड़े डेयरी नेटवर्क की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण रोजगार, शिक्षा, बिजली और मूलभूत सुविधाओं का विकास प्रभावित हुआ था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 20,557 करोड़ रुपये की लागत से 12,211 किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 13 हजार मोबाइल टावरों की योजना बनाई गई, जिनमें से 5 हजार टावर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 1804 बैंक शाखाएं, 1321 एटीएम और 800 डाकघर शुरू किए जा चुके हैं। इसके अलावा 259 एकलव्य विद्यालय, 46 आईटीआई और 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी स्थापित किए गए हैं ताकि युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके।
प्रेस वार्ता के दौरान शाह ने यह भी कहा कि नक्सल उन्मूलन अभियान में कई राज्यों की गैर-भाजपा सरकारों ने सहयोग किया, लेकिन उन्होंने पूर्व कांग्रेस सरकार पर सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने भूपेश बघेल सरकार का उल्लेख करते हुए राजनीतिक टिप्पणी भी की।
उन्होंने कहा कि अब बस्तर भय नहीं बल्कि विकास, रोजगार, खेल और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ेगा।



