पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
देशज पत्रकारों और कलम वीरों की देशी बिरादरी पर एक विदेशी पत्रकार का पीछे से हमला। इस हमले ने ना सिर्फ सोचनें को मजबूर किया बल्कि लिखने के लिए भी प्रेरित किया। सीधा संदर्भ है – नार्वे की पत्रकार हेली लिग द्वारा अपने “X” एकाउंट में विडियो शेयर कर यह लिखना ‘ नार्वे वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले नंबर पर है, जबकि भारत 157वें नंबर पर है। वह इस मामले में फिलीस्तीन, एमिरेट्स और क्यूबा से मुकाबला कर रहा है।
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विषय उठा, भारत के प्रधानमंत्री मोदी और नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार ज्वाइंट प्रेस मीट के बाद जाने लगें तब हेली लिग ने पूछा “पीएम मोदी आप दुनिया की सबसे आज़ाद प्रेस के कुछ सवालों के जवाब क्यों नहीं देते।” ज्वाइंट प्रेस मीट के बाद सिर्फ सवाल भारत के प्रधानमंत्री से ही क्यों ? क्या वो ही हर समय सीधे निशाने में थे और रहते हैं?

सवाल यही से उठता है, पश्चिमी देशों द्वारा बनाई गई संस्थाओं और उन संस्थानों द्वारा तय मापदंड पर ही क्या सब कुछ सही या ग़लत माना जायेगा ? और क्या सिर्फ कोई भी विषय आपके द्वारा तय पैमाने पर ही परखा और तौला जायेंगा ? जब आप पहले से तैयार माइंडसेट के साथ किसी संप्रभुता संपन्न राष्ट्र को नीचा दिखाने पर आमादा है तो क्या कोई भी राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व आप से लठ लेकर भिड़ जाये या शांति पूर्वक आपको अनदेखा कर निकल जाये। उचित क्या है?
भारत पूरे विश्व में क्षेत्रफल के अनुसार 7वां, जनसंख्या घनत्व में 30वां और जीडीपी में 3 (तीसरे) स्थान में है। अब बात नार्वे की, क्षेत्रफल के अनुसार पूरे विश्व में 61वां स्थान जनसंख्या घनत्व के अनुसार 224वां और जीडीपी में 49वां स्थान रखता है। भले ही आप दावा करें कि नार्वे दुनिया के सबसे विकसित लोकतंत्रों और न्यायपूर्ण राष्ट्रों में एक है परंतु भारत भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आपसे पीछे नहीं है इसका ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव है।

जहां पश्चिम बंगाल में 15 वर्ष से राज्य में शासन कर रही तणमूल कांग्रेस की हार होती है और भाजपा पूर्ण बहुमत हासिल करती है वहीं तमिलनाडु में दो वर्ष पूर्व बनी TVK सत्ता में आती है और कांग्रेस के समर्थन से अभिनेता जोसेफ विजय राज्य के मुख्यमंत्री बनते है। तमिलनाडु राज्य जो द्रविड़ राजनीति का केंद्र और हिंदू बाहुल्य राज्य वहां एक ईसाई मुख्यमंत्री बनता है। वो भी तब जब मतदाओं में ईसाई समुदाय का प्रतिशत बमुश्किल 18-19% ही है। केरल में 10 वर्षों से सत्ता में काबिज वामपंथी मुख्यमंत्री की LDF सरकार को हरा कर कांग्रेस का मुख्यमंत्री और UDF की सरकार बन जाती है। यह है भारत के लोकतांत्रिक मूल्य और व्यवस्था।

जब भारत के विदेश मंत्रालय के पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जार्ज ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहना शुरू ही किया था कि ” पहले यह समझना जरूरी है कि भारत क्या है। एक देश चार चीजों से बनता है – आबादी, सरकार, संप्रभुता और क्षेत्र। भारत 5000 साल पुरानी लगातार चलती आ रही सभ्यता है और हमने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।” इस दौरान हेली लिंग का बात को काटते हुए यह पूछना “हम भारत पर भरोसा क्यों करें” और मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दे को जबरजस्ती उठाते हुए कहना “भारत में जो हो रहा है, उसे रोका जाएगा। क्या प्रधानमंत्री कभी भारतीय प्रेस के कठिन सवालों का जवाब देंगे।” यक्ष प्रश्न यही है कि आप ने भारत में कितने वर्ष गुज़ार लियें है और क्या आप भारत के भौगोलिक रूप में अलग अलग राज्यों की आत्मा और संस्कृति से परिचित हैं ? हां वो बात अलग है कि कि आप तय माइंडसेट से किसी भी राष्ट्र और उनके प्रतिनिधियों को और खासकर “भारत” को नीचा, कमजोर और अपने से कमतर दिखाने की तैयारी ना कर ली हो ?

यदि आपने भारत के पत्रकार रविश कुमार और यूट्यूबर ध्रुव राठी को पढ़ा, सुना या देखा नहीं है तो कृपया सवाल करने से पहले तैयारी करना सीखिए – क्योंकि भारत के इस छोटे से राज्य के छोटे से शहर के हम छोटे-छोटे पत्रकारों को हमारे वरिष्ठजनों और संपादकों ने हमेशा हिदायत और सीख देते हुए तैयार किया है कि किसी भी पत्रकार वार्ता में जाने से पहले पत्रकार वार्ता के विषय की संपूर्ण तैयारी करें। और वहां जाकर जो मुंह में आये वो ना बके…..

अरे हां, अब आप सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस या प्रेस ब्रीफिंग में ही नहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में भी अनाप-शनाप बक कर अपनी टीस और भड़ास निकाल और जाहिलपना दिखा सकते हैं।




