छत्तीसगढ़ ब्यूरो
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के बरमकेला शाखा में सामने आए बहुचर्चित घोटाले में अब कार्यवाही तेज हो गई है। बैंक मुख्यालय ने विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितताएं साबित होने के बाद दो और अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अब तक की जांच में 5.35 करोड़ रुपये से अधिक के गबन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पूरे मामले में गबन-घोटालों का दायरा 100 करोड़ रुपये से ज्यादा तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
कार्रवाई के तहत एस.के. साहू तत्कालीन शाखा प्रबंधक, बरमकेला एवं वर्तमान शाखा प्रबंधक, सारंगढ़ और तात्कालिक सहायक लेखापाल (दीर्घ साख) बरमकेला एवं वर्तमान में बगीचा शाखा में पदस्थ हेमंत चौहान को निलंबित किया गया है।

एस.के. साहू पर वर्ष 2021-22 में 48 ट्रांजेक्शनों के जरिए 86.57 लाख रुपये के गबन का आरोप है। वहीं हेमंत चौहान पर 2021 से 2023 के बीच 547 ट्रांजेक्शनों के माध्यम से 5.35 करोड़ रुपये की हेराफेरी और गबन का आरोप साबित हुआ है।
गबन का तरीका
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने डीएमआर खातों में नियमों का उल्लंघन करते हुए लेन-देन किया। इसके अलावा बिना अधिकार के केसीसी खातों में नामे दर्ज कर IMPS ट्रांजेक्शन के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। सैकड़ों फर्जी ट्रांजेक्शनों के माध्यम से यह पूरा खेल अंजाम दिया गया।

नोटिस के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं
बैंक प्रबंधन ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद सख्त कदम उठाते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान दोनों का मुख्यालय जशपुर निर्धारित किया गया है।
100 करोड़ से अधिक गबन-घोटाले की आशंका
सूत्रों के मुताबिक यह घोटाला केवल बरमकेला शाखा तक सीमित नहीं है, बल्कि रायगढ़ और सरगुजा क्षेत्र तक फैले बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। शुरुआती जांच में सामने आई रकम महज एक हिस्सा मानी जा रही है, जबकि वास्तविक गबन इससे कहीं अधिक हो सकता है।
उठ रहे बड़े सवाल
अब इस मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या इस घोटाले में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भी भूमिका है? और अब तक इन पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?
गबन की पूरी राशि की वसूली कैसे होगी?
जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक कब पहुंचेंगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है। फिलहाल बैंक प्रशासन ने शुरुआती कार्यवाही करते हुए दो अधिकारियों को निलंबित किया है, लेकिन घोटाले की वास्तविक परतें अभी खुलना बाकी हैं। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने और बड़े खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।



