पंकज विश्वकर्मा,
समाचार संपादक
रायपुर/बीजापुर. महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन कमिश्नर आईएएस तुकाराम मुंढे का एक्शन लगातार जारी है। उन्होंने एक मुहिम चला रखी है ‘सुरक्षित भोजन, सुरक्षित महाराष्ट्र’। इस मुहिम के तहत हाल ही में मैकडॉनल्ड्स और द बॉम्बे प्रेसीडेंसी रेडियो क्लब समेत सात रेस्टोरेंट के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
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इसमें खार जिमखाना का रेस्टोरेंट भी शामिल है। तुकाराम की अगुवाई वाली एफडीए ने यह एक्शन बिना बताए एनालॉग पनीर के इस्तेमाल और जिंदा कॉकरोच के साथ गंदगी मिलने पर लिया है। तुकाराम मुंढे की लगातार कार्रवाई ने मुंबई और महाराष्ट्र में और हड़कंप मचा दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि तुकाराम मुंढे के बेबाक एक्शन और कार्रवाई की चर्चा पूरे देश में हो रही है।
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अब बात करते हैं बीजापुर की, बस्तर के दक्षिणी इलाके का एक आदिवासी बाहुल्य जिला मुख्यालय। यहां पदस्थ हैं खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी दीपक कुमार देवांगन। पिछले दिनों शहर सबसे बडे मिठाई कारोबारी की फैक्ट्री में इन्होंने औचक निरीक्षण किया। पंरतु व्यापारिक प्रतिष्ठान ने निरीक्षण पर घोर आपत्ति करते हुए व्यापारी की पत्नी को आगे कर दिया।
पत्नी ने भी खाद्य पदार्थों के निर्माण और फैक्ट्री की कमियों को छुपाने के लिए हुज्जत और बहसबाज़ी शुरू कर दी। इसके साथ ही व्यापारी ने अपने साथ के अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान के साथियों को भी बुला लिया। प्रतिष्ठान की खामियों को छुपाने के लिए अधिकारी दीपक देवांगन पर व्यापारी के घर बिना अनुमति प्रवेश और महिलाओं से आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप लगा दिए गए।
व्यापारियों का आरोप यह भी था कि बगैर बिना नोटिस या पर्याप्त टीम के निरीक्षण करने कैसे पहुंचे अधिकारी। अब भला कोई भी अधिकारी औचक निरीक्षण को नोटिस भेजकर या बता कर तो करेगा नहीं। बहरहाल विवाद बढ़ने पर कोतवाली पुलिस ने पहुंचकर दोनों पक्षों की बात सुनी और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। जबकि पूर्व में भी अधिकारी पर जबरन वसूली और 5 किलो काजू-बादाम ले जाने के आरोप लगा दिए गये थे। इन आरोपों की सच्चाई जानने जब दूसरे गुट के अन्य बड़े व्यापारियों से “रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24” की टीम ने बातचीत की तो पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिस 5 काजू की बात की जा रही है वह खाने योग्य नहीं था इसलिए उसकी ज़ब्ती बनाई गई थी।
वहां की एक प्रतिष्ठित चाय दुकान में भी बातचीत के दौरान यह बात पता चली थी कि हाल ही में भी अधिकारी दीपक देवांगन ने वहां भी दबिश दी थी और कमियों को सुधारते की समझाइश के साथ फाईन काट कर रसीद भी दी थी। जबकि मिठाई कारोबारी की फैक्ट्री में अधिकारी के औचक निरीक्षण पर व्यापारियों ने FIR की मांग करते हुए 19 अगस्त को बीजापुर बंद का आह्वान कर दिया था।
बंद के दौरान कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे जबकि अन्य व्यापारिक संस्थान खुलें रखे गए थे। इस संबंध में व्यापारिक प्रतिष्ठान से संपर्क किया गया उन्होंने फोन नहीं उठाया, जबकि खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी दीपक कुमार देवांगन ने कहा कि “मैंने अपनी बात और संपूर्ण वस्तु स्थिति कलेक्टर साहब को बता दी है, निर्णय वहीं करेंगे फिलहाल मैं कैमरे में कुछ नहीं बोल पाऊंगा।”

अब सबसे यक्ष प्रश्न तो यही है कि क्या किसी भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी को विधि अनुरूप कार्य करने की स्वतंत्रता क्यों नहीं दी जानी चाहिए ? या यूं कहें कि भोले-भाले आदिवासियों और ग्रामीणों को खाद्य पदार्थों के नाम पर कुछ भी बेचा जायें और विभागीय कार्रवाई पर बेजा आरोपों की बौछार से आवाज को ही दबा दिया जायें ? क्या बीजापुर के एक कर्मठ अधिकारी को शासन-प्रशासन का संरक्षण मिलेगा या फिर रसूखदारों का दबाव जीत जायेगा……?




