रायपुर। राजधानी रायपुर पुलिस ने देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस प्रकरण में दो महिला आरोपियों को नागपुर से पकड़ा जा चुका था। इस तरह अब तक कुल 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, 17 मोबाइल फोन और ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान जब्त किया है।
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पुलिस के अनुसार, यह गिरोह वर्ष 2005 से सक्रिय था और अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 100 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुका है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने लोगों से अरबों रुपये की ठगी की है। गिरोह का मुख्य सरगना ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन, शेट्टी और रेड्डी तथा मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर बताए गए हैं।

यह मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है, जहां प्रार्थी के साथ 1 करोड़ 13 लाख रुपये की ठगी की गई थी। इस मामले में अपराध क्रमांक 330/26 के तहत धारा 318(4) और 61(2) बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और तेलीबांधा थाना पुलिस की संयुक्त टीम कर रही थी।

जांच के दौरान पुलिस ने पहले दो महिला आरोपियों कनिज फातमा उर्फ भावना पांडेय और दीपिका पॉलीवाल को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। इसके बाद उनके मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की गई। चैट, संपर्क नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
पुलिस टीम को जानकारी मिली कि गिरोह के सदस्य पुणे में सक्रिय हैं। इसके बाद टीम पुणे रवाना हुई और करीब एक सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। इस दौरान खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में पुलिस ने दबिश दी और सात आरोपियों को दबोच लिया।
पुलिस के अनुसार, जिस समय कार्रवाई की गई, आरोपी वाराणसी के एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर रिसॉर्ट बुलाए हुए थे। पीड़ित अपने साथ करोड़ों रुपये लेकर पहुंचा था और आरोपियों के झांसे में आकर रकम उन्हें सौंप चुका था। इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले पेपर, कांच की प्लेट, रासायनिक प्रक्रिया में उपयोग होने वाला अन्य सामान और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह लोगों को निवेश, विदेशी फंड और बड़ी रकम दोगुनी करने का लालच देता था। आरोपी पहले पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए खुद को प्रभावशाली व्यक्तियों और बड़े निवेशकों से जुड़ा हुआ बताते थे। लोगों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, राजस्थान, गुजरात और अन्य बड़े शहरों के फाइव स्टार होटलों में बुलाया जाता था।
आरोपी कथित रूप से “वॉश-वॉश ब्लैक करेंसी स्कैम” का इस्तेमाल करते थे। वे काले रंग के नोटों को विशेष केमिकल और विदेशी तकनीक से असली भारतीय मुद्रा में बदलने का झूठा प्रदर्शन करते थे। इसके लिए पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को भ्रमित किया जाता था। इसके बाद विदेशी केमिकल, परीक्षण, अधिकारियों की अनुमति और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर अलग-अलग किश्तों में करोड़ों रुपये की ठगी की जाती थी।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के कुछ सदस्य पहले भी मुंबई और वाराणसी में ठगी के मामलों में जेल जा चुके हैं। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। रायपुर पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और देशभर में हुई ठगी की अन्य घटनाओं की भी जांच कर रही है।




