भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस वर्ष बेहद खास और अनूठे खगोलीय संयोग के साथ आ रहा है। इस साल सावन मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन ही साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।
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इस दुर्लभ संयोग को लेकर देश भर में भाई-बहनों के मन में यह संशय बना हुआ है कि क्या ग्रहण के साये का असर इस पावन त्योहार पर पड़ेगा या नहीं।
28 अगस्त को लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण
पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, साल का यह दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 06:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगा। लगभग 5 घंटे 39 मिनट की अवधि वाले इस ग्रहण के दौरान विश्व के कई हिस्सों में ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, जहाँ चंद्रमा लाल या तांबे जैसे रंग का नजर आएगा।
क्यों दिखाई देता है ‘ब्लड मून’?
वैज्ञानिक दृष्टि से जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं, तब सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाता। पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय कम तरंगदैर्घ्य वाला नीला प्रकाश प्रकीर्णित (Scatter) हो जाता है, जबकि अधिक तरंगदैर्घ्य वाली लाल किरणें चंद्रमा की सतह पर पड़ती हैं। इसी कारण ग्रहण के दौरान चाँद गहरा लाल या तांबे जैसा प्रतीत होता है।
क्या भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण और सूतक काल?
ज्योतिषाचार्यों और खगोलशास्त्रियों के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के समय भारत में दिन का उजाला रहेगा, जिससे यहाँ इसकी दृश्यता शून्य रहेगी। यह मुख्य रूप से यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका महाद्वीप और एशिया के पश्चिमी हिस्सों में ही नजर आएगा।
शास्त्रों के अनुसार, जहाँ ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहाँ उसका सूतक काल भी मान्य नहीं होता। चूँकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं रहेगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बेझिझक बाँध सकेंगे राखी
सूतक काल मान्य न होने के कारण बहनें बिना किसी संकोच या असमंजस के पूरे दिन हर्षोल्लास के साथ अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँध सकेंगी। पंचांग के अनुसार त्योहार मनाने और राखी बाँधने के लिए पूरा दिन शुभ और श्रेष्ठ रहेगा।



