बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 की चयन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। विज्ञापित पदों की संख्या के मुकाबले साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है। अदालत के निर्देश के बाद अब चयन प्रक्रिया में नियमों के अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
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मामला मुख्य रूप से साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन के अनुपात से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई है कि राज्य सेवा परीक्षा के नियमों के मुताबिक विज्ञापित पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए। वहीं आयोग ने विज्ञापन में निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक के आधार पर उम्मीदवारों की संख्या सीमित करने की बात कही है।
265 पदों पर 795 अभ्यर्थियों का दावा
याचिका में राज्य सेवा परीक्षा नियम 3(2) का हवाला देते हुए कहा गया है कि विज्ञापित पदों की संख्या के अनुपात में साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया जाना चाहिए। इस आधार पर याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्ष 2025 की परीक्षा में कुल 265 पद विज्ञापित किए गए हैं।
1:3 के अनुपात को आधार मानें तो करीब 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। लेकिन आयोग ने साक्षात्कार के लिए 608 अभ्यर्थियों को पात्र माना। इसी अंतर को लेकर याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि तय नियम के अनुरूप अभ्यर्थियों का चयन नहीं होने के कारण ऐसे उम्मीदवार भी इंटरव्यू प्रक्रिया से बाहर हो गए, जो चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने की उम्मीद कर रहे थे।
आयोग ने कटऑफ का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान CGPSC की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने आयोग की चयन प्रक्रिया का पक्ष रखा। आयोग की ओर से विज्ञापन के क्लॉज-4 का उल्लेख करते हुए बताया गया कि साक्षात्कार के लिए उम्मीदवारों की पात्रता निर्धारित करने में न्यूनतम अर्हक अंक का प्रावधान रखा गया था।
आयोग के अनुसार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 23 प्रतिशत न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए थे। जिन अभ्यर्थियों ने यह न्यूनतम अंक हासिल नहीं किए, उन्हें आगे की चयन प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं माना गया।
आयोग का तर्क है कि इसी व्यवस्था के कारण साक्षात्कार के लिए पात्र उम्मीदवारों की संख्या 795 के बजाय 608 रही। आयोग ने अदालत के समक्ष चयन प्रक्रिया को विज्ञापन में निर्धारित शर्तों और लागू प्रावधानों के अनुरूप बताया है।
हाईकोर्ट ने पांच दिन में मांगा जवाब
मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने CGPSC से इस पूरे मामले में विस्तृत जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने आयोग को पांच दिन के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि 1:3 अनुपात और विज्ञापन में निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक के प्रावधानों को किस आधार पर लागू किया गया।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में आयोग के जवाब और चयन प्रक्रिया से जुड़े नियमों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन पहले ही स्थगित
इस विवाद के बीच CGPSC ने साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर पहले ही अस्थायी कदम उठाया था। आयोग ने 20 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को 16 सितंबर को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया था।
अब हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद ही इस प्रक्रिया की अगली दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल 265 पदों के लिए अभ्यर्थियों के चयन और साक्षात्कार की संख्या को लेकर उठे सवाल पर आयोग के जवाब तथा अदालत के अगले निर्देश पर उम्मीदवारों की नजर है।
मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आगामी आदेश और आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले शपथ पत्र के बाद ही स्पष्ट होगी।




