सावन का पवित्र महीना संयम, साधना और सात्विकता का प्रतीक है। ज्योतिषियों और धार्मिक आचार्यों के अनुसार, शुद्ध मन, मधुर वाणी और सात्विक विचारों के साथ भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
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मान्यता है कि पूरे सावन के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर निवास करते हैं तथा भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। सावन में जहाँ पूजा-पाठ का विशेष महत्व है, वहीं कुछ नियमों का पालन करना भी अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सावन में की गई कुछ गलतियाँ भोलेनाथ को अप्रसन्न कर सकती हैं।
सावन में रखें इन बातों का विशेष ध्यान
1. तामसिक भोजन और नशीली चीजों का परहेज
सावन में लहसुन, प्याज, मांस, मछली और अंडे जैसी तामसिक चीजों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। साथ ही, शराब या अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन वर्जित है। इस दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने से ही पूजा का पूर्ण फल मिलता है।
2. शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये सामग्री
हल्दी और कुमकुम: ये स्त्रैण सामग्री मानी जाती हैं, इसलिए इन्हें शिवलिंग पर अर्पित न करें।
तुलसी के पत्ते: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जालंधर वध के कारण तुलसी जी ने शिव पूजा में अपने प्रयोग पर रोक लगाई थी।
- केतकी के फूल: केतकी के फूल को भगवान शिव ने अपनी पूजा से त्याग दिया था।
- कटे-फटे बेलपत्र: खंडित या कटे-फटे बेलपत्र अर्पित करना अशुभ माना जाता है।
3. तांबे के बर्तन से न चढ़ाएं दूध
शिवलिंग पर दूध अर्पित करना शुभ होता है, लेकिन ध्यान रखें कि तांबे के बर्तन से दूध कभी न चढ़ाएं। तांबे के संपर्क में आने से दूध विषैला हो जाता है। दूध अर्पित करने के लिए पीतल, चांदी या स्टील के पात्र का उपयोग करें। तांबे के बर्तन से केवल जल ही अर्पित करें।
4. शरीर पर तेल लगाना व बाल-नाखून काटना वर्जित
शास्त्रों के अनुसार, सावन में शरीर पर तेल मालिश (विशेषकर रविवार को) वर्जित है। इसके अलावा, इस महीने में बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना भी अशुभ माना गया है।
5. दिन में सोने से बचें
सोमवार का व्रत रखने वाले या सामान्य दिनों में शिव भक्ति करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर के समय सोने से बचना चाहिए। यह समय शिव नाम के स्मरण और मंत्र जाप के लिए उत्तम माना गया है।
6. जीव-जंतुओं को नुकसान न पहुंचाएं
सावन में किसी भी जीव को न सताएं। विशेष रूप से सांप और सांड को भगाने के लिए डंडे का प्रयोग न करें और न ही उन्हें चोट पहुंचाएं। नंदी भगवान शिव के वाहन हैं और नाग देवता उनके आभूषण।
7. क्रोध और कटु वचनों का त्याग
सावन आत्मिक शुद्धि का समय है। इस दौरान किसी का दिल न दुखाएं, चुगली न करें और न ही क्रोध करें। बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान करने से शिव पूजा का फल नष्ट हो जाता है।
8. हरी सब्जियों व बैंगन से परहेज
धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारणों से सावन में बैंगन खाना वर्जित है। धार्मिक दृष्टिकोण से बैंगन को अशुद्ध माना गया है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से बारिश के मौसम में बैंगन में कीड़े लग जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।



