विशेष संवाददाता RNN 24
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान सामने आए चर्चित घोटालों की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। कोल लेवी, शराब, डीएमएफ, महादेव ऑनलाइन सट्टा, सीजीएमएससी, कस्टम मिलिंग, भारतमाला और सीजीपीएससी भर्ती जैसे मामलों में केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। इन आठ प्रमुख मामलों में करीब 10,933 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है, जबकि 5,378 करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्तियां अब तक अटैच की जा चुकी हैं।
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जांच एजेंसियों में आयकर विभाग (IT), प्रवर्तन निदेशालय (ED), आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) शामिल हैं। कार्रवाई के दायरे में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, कारोबारी, ठेकेदार और प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों से जुड़ी संपत्तियां भी आई हैं।
अदालती फैसले तक नहीं होगी संपत्तियों की बिक्री
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जांच के दौरान अटैच की गई संपत्तियों का उपयोग तो किया जा सकता है, लेकिन उन्हें बेचना, गिरवी रखना, हस्तांतरित करना या उन पर नया निर्माण करना प्रतिबंधित रहता है। यदि संबंधित मामलों में अदालत दोष सिद्ध करती है, तो ये संपत्तियां सरकार के अधिकार में चली जाएंगी। इसके बाद राजसात (Confiscation) की प्रक्रिया पूरी कर इन्हें नीलाम किया जाएगा और प्राप्त राशि सरकारी खजाने में जमा होगी।
जांच में ऐसे होती है कार्रवाई
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी आर्थिक अपराध या घोटाले की जांच के दौरान एजेंसियां आरोपियों की आय के स्रोत, बैंक लेनदेन और कथित अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों की पड़ताल करती हैं। यदि यह पाया जाता है कि कोई संपत्ति कथित अवैध धन से अर्जित की गई है, तो उसे अस्थायी रूप से अटैच कर दिया जाता है।
हालांकि संबंधित व्यक्ति के पास यह अधिकार होता है कि वह वैध आय, पैतृक संपत्ति या अन्य कानूनी दस्तावेजों के आधार पर अदालत में अपनी संपत्ति का दावा प्रस्तुत करे। यदि दावा सही पाया जाता है, तो अटैचमेंट हटाया जा सकता है।
किन मामलों की हो रही जांच
शराब घोटाला: अवैध बिक्री, कमीशन और राजस्व में हेराफेरी से करीब 3,200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच।
कोल लेवी मामला: कोयला परिवहन पर प्रति टन अवैध वसूली के जरिए लगभग 540 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच।
डीएमएफ घोटाला: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने फंड में करीब 575 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता।
सीजीएमएससी मामला: अस्पतालों और हमर लैब के लिए उपकरण खरीद में लगभग 411 करोड़ रुपये के नियम उल्लंघन के आरोप।
कस्टम मिलिंग: धान मिलिंग प्रक्रिया में करीब 175 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली और कमीशनखोरी।
भारतमाला परियोजना: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग 75 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल करने के आरोप।
सीजीपीएससी भर्ती मामला: चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितता, पक्षपात और प्रभाव के इस्तेमाल की जांच।
महादेव सट्टा एप मामला: ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय लेनदेन की जांच।
अटैच संपत्ति के खिलाफ अपील का अधिकार
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा किसी संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच करने के बाद मामला नई दिल्ली स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष भेजा जाता है। वहां के आदेश के खिलाफ पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण, संबंधित हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक अपील की जा सकती है।
वहीं एसीबी और ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होती है। यदि आरोपी मुख्य मामले में बरी हो जाता है या संपत्ति के वैध स्रोत साबित कर देता है, तो अटैचमेंट हटाने का रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा बैंक या निर्दोष खरीदार भी अपने वैध अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
फिलहाल इन सभी चर्चित मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी है और कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी भी लंबित है। अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर लिया जाएगा।



