नई दिल्ली: पेपर लीक के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। मॉनसून सत्र के दूसरे दिन संसद से प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ नेता 7 लोक कल्याण मार्ग के निकट धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी नेता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
यह भी पढ़े :- शराबी बेटे से तंग आकर पिता ने डंडे और कुल्हाड़ी से मार डाला, आरोपी गिरफ्तार
संसद से सड़क तक हंगामा
धरने से पहले राहुल और प्रियंका गांधी ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की। इसके बाद नेताओं ने पीएम आवास की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’, ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ और ‘छात्रों को न्याय दो’ जैसे नारे लगाए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “सरकार न तो जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में बहस कराने को तैयार है। हमारे बच्चों के साथ हुए अत्याचार का हिसाब तो देना ही होगा।” उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जिस देश में छात्र अपना भविष्य खो दे और मंत्री अपनी कुर्सी न खोए, वहां न्याय नहीं है।
सरकार के साथ बातचीत और शर्तों में बदलाव
धरने के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन पुलिस अधिकारियों के साथ राहुल गांधी को मनाने पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और दोबारा धरनास्थल पर लौटकर जानकारी दी कि सरकार संसद के मॉनसून सत्र में NEET मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, चर्चा के आश्वासन के बाद राहुल गांधी ने अपनी मांग बदलते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की शर्त रख दी।
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की
प्रदर्शन के लगभग दो घंटे बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
मौके पर एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पहुंचे। अंततः पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और शशिकांत सेंथिल समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया।



