हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखने वाली देवशयनी एकादशी की तारीख को लेकर बना भ्रम दूर हो गया है। उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा। इसी दिन से भगवान श्रीहरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ये मांगलिक कार्य पुनः ‘देवउठनी एकादशी’ से प्रारंभ होंगे।
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तिथि और समय तालिका (पंचांग अनुसार)
| कार्यक्रम / मुहूर्त | निर्धारित समय |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 24 जुलाई, प्रातः 09:13 बजे से |
| एकादशी तिथि समाप्त | 25 जुलाई, प्रातः 11:35 बजे तक |
| प्रातःकालीन पूजन मुहूर्त | 25 जुलाई, प्रातः 04:17 से 06:10 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त (दोपहर) | 25 जुलाई, दोपहर 12:00 से 12:55 बजे तक |
| संध्या पूजन मुहूर्त | 25 जुलाई, सायंकाल 07:17 से रात्रि 08:19 बजे तक |
| व्रत पारण का समय | 26 जुलाई, प्रातः 05:40 से 08:20 बजे तक |
पूजन विधि: कैसे करें भगवान विष्णु की आराधना?
शास्त्रों के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है:
- स्नान व संकल्प: प्रातःकाल स्नान के पश्चात स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें और श्रीहरि के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- प्रतिमा स्थापना: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- अभिषेक व श्रृंगार: भगवान को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद पीले वस्त्र, पीले फूल, चंदन, रोली, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
- विशेष भोग: पीले फल और सात्विक मिष्ठान का भोग लगाएं। ध्यान रहे, भोग में तुलसी पत्र का होना अनिवार्य है।
- कथा व आरती: एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें और अंत में धूप-दीप से आरती उतारें। पूजा के दौरान निरंतर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करते रहें।
दान का विशेष महत्व
देवशयनी एकादशी पर व्रत के साथ-साथ दान-पुण्य का बहुगुणित फल मिलता है। जो श्रद्धालु व्रत नहीं रख पाते, वे भी दान करके पुण्य अर्जित कर सकते हैं।
अन्न दान महादान: इस दिन अन्न दान को सर्वोपरि माना गया है।
दान योग्य सामग्री: चावल, दाल, आटा, शुद्ध घी, गुड़, नमक, मौसमी फल और ताजी सब्जियों का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।



