रायपुर। रायपुर रेंज पुलिस की ओर से चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत साइबर अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले दो पीओएस (POS) एजेंटों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी मध्यप्रदेश के छतरपुर और छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ के रहने वाले हैं।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि इनके द्वारा जारी किए गए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में इनाम जीतने का झांसा देकर ठगी करने जैसे साइबर अपराधों में किया गया था।
पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रेंज साइबर थाना रायपुर ने दो अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान इस गिरोह का खुलासा किया।
पहला मामला गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना क्षेत्र का है, जहां एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फेसबुक पर दोस्ती करने के बाद व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उसका वीडियो मॉर्फ कर अश्लील क्लिप बनाई गई और उसे यूट्यूब पर वायरल करने की धमकी देकर करीब 7.90 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
दूसरा मामला रेंज साइबर थाना रायपुर में दर्ज हुआ, जिसमें पीड़ित को कौन बनेगा करोड़पति में इनाम जीतने का झांसा देकर टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम जमा कराने की कोशिश की गई। इस मामले में धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया आईडी की जानकारी संबंधित सेवा प्रदाताओं से प्राप्त की। तकनीकी विश्लेषण, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ के आधार पर दो मोबाइल दुकान संचालकों की भूमिका सामने आई, जिन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश प्रजापति (23 वर्ष) निवासी मनकारी, जिला छतरपुर (मध्यप्रदेश), जो प्रजापति टेलीकॉम संचालित करता है, तथा मनोज देवांगन (29 वर्ष) निवासी प्रकाशपुर चिचोला, जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, जो मनोज मोबाइल, मुढ़ीपार का संचालक है, के रूप में हुई है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने आने वाले ग्राहकों के बायोमेट्रिक सत्यापन (ई-केवाईसी) का दुरुपयोग कर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड सक्रिय कर देते थे। जिन ग्राहकों के पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डी-केवाईसी के माध्यम से भी अतिरिक्त सिम जारी किए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को अधिक कीमत पर साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग में किया जाता था।
पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की अपील की है। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, अज्ञात वीडियो कॉल से बचने, किसी भी प्रकार के इनाम, लॉटरी या केबीसी जीतने के नाम पर मांगे जाने वाले टैक्स या शुल्क का भुगतान नहीं करने तथा बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई है।



