हिंदू धर्म में भगवान शिव को अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भोलेनाथ महज एक लोटा जल अर्पित करने से ही अपने भक्तों पर कृपा बरसा देते हैं। सोमवार का दिन विशेष रूप से देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए व्रत रखते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां नियमानुसार की गई पूजा से महादेव जीवन के सारे कष्ट हर लेते हैं, वहीं शास्त्रों में शिव पूजा से जुड़े कुछ कड़े नियम भी बताए गए हैं। यदि पूजा के दौरान इन नियमों की अनदेखी की जाए या अनजाने में कुछ वर्जित चीजें चढ़ा दी जाएं, तो भोलेनाथ रुष्ट हो सकते हैं और आपकी पूजा का फल पूरी तरह नष्ट हो सकता है।
अगर आप भी सोमवार को शिव आराधना करते हैं, तो भूलकर भी इन 6 चीजों का उपयोग न करें:
1. शिवलिंग पर कभी न चढ़ाएं हल्दी
आमतौर पर हर मांगलिक कार्य और पूजा-पाठ में हल्दी का उपयोग अनिवार्य माना जाता है, लेकिन शिव पूजा में यह पूरी तरह वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार, हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य प्रसाधन से है, जबकि शिवलिंग को पुरुषत्व का प्रतीक माना गया है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना अशुभ माना जाता है।
2. केतकी और केवड़े के फूलों से परहेज
भोलेनाथ को कनेर और कमल के फूल अत्यंत प्रिय हैं, लेकिन उन्हें लाल रंग के फूल पसंद नहीं हैं। इसके अलावा, शिव जी की पूजा में केतकी और केवड़े के फूलों का इस्तेमाल सख्त मना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक झूठ में साथ देने के कारण शिव जी ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से बहिष्कृत कर दिया था।
3. कुमकुम और रोली लगाने से बचें
महादेव वैरागी और भस्म रमाने वाले देवता हैं। कुमकुम और रोली को सौभाग्य और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है, यही वजह है कि शिव जी को कभी भी कुमकुम या रोली नहीं लगाई जाती। उनकी पूजा में हमेशा चंदन या भस्म का ही त्रिपुंड लगाना चाहिए।
4. शिव जी की पूजा में वर्जित है शंख
शंख को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय पात्र माना जाता है, लेकिन शिव पूजा में न तो शंख बजाया जाता है और न ही इससे जल अर्पित किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव ने शंखचूर नामक अत्याचारी असुर का वध किया था, जिसके कारण शिव साधना में शंख का प्रयोग निषेध है।
5. नारियल पानी से न करें अभिषेक
भगवान शिव का अभिषेक जल, दूध, दही, घी और शहद जैसी चीजों से किया जाता है, लेकिन कभी भी नारियल के पानी से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहिए। नारियल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है और इसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि, शिवलिंग पर चढ़ने के बाद नारियल का पानी ग्रहण करने योग्य नहीं रह जाता, इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए।
6. तुलसी दल चढ़ाने की भूल न करें
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन शिव पूजा में तुलसी का पत्ता चढ़ाना वर्जित है। कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने असुरराज जलंधर का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा बाद में तुलसी का पौधा बनीं। वृंदा ने शिव जी को श्राप दिया था कि उनकी पूजा में कभी भी तुलसी का उपयोग नहीं किया जाएगा।
Disclaimer : यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक कथाओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।



