पंकज विश्वकर्मा, समाचार संपादक
रायपुर। छत्तीसगढ़. राज्य में 15 नवंबर से सरकार द्वारा धान खरीदी महाअभियान शुरू किया गया था। धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई है। छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य 160 लाख मिट्रिक टन था जबकि कुल खरीदी 139.8 ही हो पाई है। यह आंकड़ा तय सरकारी लक्ष्य से 13% की कमी दर्शाता है।
धान खरीदी महाअभियान के शुरुआती दिनों में ही प्रदेश भर के सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर जाने से उपार्जन प्रभावित हुआ था। चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के सभी 2058 सेवा सहकारी समितियों के प्रबंधक सहित लगभग 12 हज़ार कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। शासन द्वारा धान खरीदी में संलग्न कर्मचारियों को अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (ESMA) के तहत अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया था, जिससे उपार्जन प्रक्रिया निर्बाध रूप से संचालित रहे।
जहां छत्तीसगढ़ जिसे धान का कटोरा कहा जाता है वहां धान खरीदी महाअभियान भष्ट्राचार – घोटालों का महाअभियान बन चुका था। कवर्धा में 7 करोड़ का धान चूहों ने चट कर डालें। मुंगेली में 8.14 करोड़ का धान अवैध ओवरलोडिंग, फर्जी वाहनों से परिवहन और रिसाइक्लिंग के फर्जीवाड़े के भेंट चढ़ गया।
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जांजगीर चांपा में 6 करोड़ का धान सड़कर बर्बाद हो गया। सूरजपुर में निगरानी तंत्र में कमी की वजह से सैकड़ों स्टैक में से हजारों क्विंटल धान ग़ायब हो गया। सक्ति के धान खरीदी केन्द्रों में हजारों क्विंटल धान निकाल कर बोरियों में मिट्टी – कंकड़ भरकर करोड़ों रुपए का गड़बड़झाला और फर्जीवाड़ा किया गया। रायपुर में हजारों क्विंटल धान भौतिक सत्यापन में कम पाया गया। बिलासपुर में आंखों में आंसू लिए किसान दर दर गुहार लगाते नजर आयें कि “साहब, हमारा धान तो बिकवा दीजिए।” वहीं महासमुंद जिले में 5.71 करोड़ के धान पर चूहों का हमला हुआ था।

पिछले वर्ष महासमुंद जिला सर्वाधिक 11.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर राज्य में पहले नंबर पर था। जहां जिले में इस वर्ष 10 लाख मिट्रिक टन की धान खरीदी हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9% कम है। वहीं जो जिला पिछले वर्ष राज्य में धान खरीदी में पहले नंबर पर था वो इस वर्ष 28 वें नंबर पर है। महासमुंद जिले के किसानों ने आज पिथौरा तहसील कार्यालय का घेराव किया और धरने में बैठने की चेतावनी दी। पिथौरा तहसील क्षेत्र के राजाडे़रा इलाके के 7 गांव का ये मामला है, जहां के 90 से अधिक किसानों ने अब तक अपना धान नहीं बेचा है। पीड़ित किसानों के अनुसार उन्होंने ऑनलाइन टोकन कटवाने की कोशिश की, लेकिन लिमिट कम होने के चलते 31 जनवरी तक टोकन नहीं कटवा पाए। ऐसे में धान खरीदी की आखिरी तारीख तक किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं।
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धमतरी जिले में किसान संघर्ष समिति ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सांकेतिक भूख हड़ताल और चक्काजाम किया। यह प्रदर्शन तुमड़ीबहार में सांकरा से मैनपुर मुख्यमार्ग पर किया गया, जिसमें लगभग 20 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। धमतरी जिले में इस वर्ष 5.91 मिट्रिक टन धान की खरीद हुई है, सरकारी आंकड़ों के अनुसार लक्ष्य से 5% कम और राज्य में धान खरीदी के मामले में यह जिला 11 वें स्थान पर है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर यह आरोप लगाया है कि किसानों से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा गया है। बैज का कहना है कि ‘सरकार ने धान खरीदी बंद कर दी है, लाखों किसान धान बेचने के वंचित रहे हैं। यह सरकार 53 दिन ही धान खरीद पाई है, 139 लाख मीट्रिक धान खरीदा गया है, सरकार ने अपने लक्ष्य से 25 लाख मिट्रिक टन धान कम खरीदा है। पिछले साल भी सरकार ने 9 लाख मीट्रिक टन धान कम खरीदा था। 5 लाख से अधिक किसान एग्री स्टैक पोटल से पंजीयन नहीं करवा पाए, सरकार शुरू से ही इस कोशिश में लगी रही कि किसानों का कम से कम धान खरीदे। सरकार ने दुर्भावनापूर्वक किसानों का ध्यान नहीं खरीदा, पिछले साल की तुलना में 29 जिलों में धान की खरीदी कम की गई और सरकार जश्न मना रही है। यह किसानों के साथ भद्दा मजाक है सरकार को इस पर माफी मांगना चाहिए। दीपक बैज ने पूछा है कि सरकार बताएं कि किसानों का धान कम क्यों खरीदा गया? कौन है इसका जिम्मेदार?

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पिछले दिनों मीडिया से बात करते हुए कहा था कि ” मुझे विश्वास है धान खरीदी अच्छे से जारी है। दो दिन पहले धान खरीदी की समीक्षा की थी, जिसके बाद विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसान का धान बिकना चाहिए। धान खरीदी की तारीख बढ़ाने को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि कांग्रेस विपक्ष का धर्म निभा रही है, लेकिन कांग्रेस मुद्दाविहीन है और क्या करेगी? वहीं, धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन को लेकर कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा है कि धान खरीदी के लिए समय बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। छत्तीसगढ़ में पर्याप्त मात्रा में धान खरीदी हुई है, किसानों का एक-एक दाना धान खरीद रहे हैं। कांग्रेस देखे किस मुंह से आरोप लगाती है।



