कांकेर : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक बार फिर मलेरिया ने भयावह रूप ले लिया है। कांकेर जिले में महज 10 दिनों के भीतर 3 स्कूली बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी छात्रावासों में रहने वाले दो मासूम छात्रों की हाल ही में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि 11 अन्य छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। प्रभावित छात्रावासों और गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
झाड़-फूंक के चक्कर में बिगड़ी मासूम की तबीयत
कांकेर जिले के मर्दापोटी और इरादाह छात्रावासों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। मर्दापोटी आश्रम के चौथी कक्षा के छात्र सुभाष कुमेटी (9 वर्ष) की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रावास में कई बच्चों को तेज बुखार और सिरदर्द की शिकायत हुई थी। जांच में 4 छात्र मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सुभाष की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक कराने ले गए। हालत अधिक बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
इससे पूर्व डोमाहर्रा गांव निवासी करीना विश्वकर्मा (9 वर्ष) की भी मलेरिया से मृत्यु हो गई थी। करीना अपनी दो सगी बहनों के साथ तेज बुखार के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हुई थी, जहां उसकी बहनों का इलाज अब भी जारी है।
22 जुलाई तक सब सामान्य, 24 के बाद बिगड़े हालात
आदिम जाति कल्याण विभाग की सहायक आयुक्त जया मनु ने बताया कि 22 जुलाई को सभी छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य जांच कराई गई थी, तब कोई भी बच्चा संक्रमित नहीं पाया गया था। हालांकि, 24 जुलाई के बाद अचानक मामले बढ़ने शुरू हो गए।
गंभीर मरीज रायपुर रेफर
संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित छात्रों में तामेश्वर भास्कर (7 वर्ष) और विक्रम मंडावी (8 वर्ष) शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। वहीं, नवीन कुमेटी का इलाज एमसीएच (MCH) अस्पताल, अलबेलापारा में चल रहा है।



