रायपुर। रायपुर–विशाखापट्नम इकॉनॉमी कॉरिडोर से जुड़े भारतामाला मुआवजा घोटाले की जांच अब राज्य से निकलकर केंद्रीय एजेंसियों के दायरे में पहुंच गई है। करोड़ों रुपये के इस बहुचर्चित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रिय एंट्री के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
ईडी ने इस मामले के शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू से करीब सात घंटे तक गहन पूछताछ की और घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। पूछताछ का यह सिलसिला दोपहर करीब 11.30 बजे शुरू हुआ, जब साहू मोतीबाग स्थित नेताजी सुभाष स्टेडियम परिसर में स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे। पूछताछ शाम करीब 7 बजे तक चली।
सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने मुआवजा वितरण प्रक्रिया, भूमि के रकबे में कथित हेराफेरी, फर्जी प्रविष्टियों, लाभार्थियों के चयन और भुगतान प्रणाली से जुड़े कई संवेदनशील बिंदुओं पर विस्तृत सवाल किए।
पूछताछ के बाद शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि उन्होंने ईडी को घोटाले से जुड़े ठोस दस्तावेज और प्रमाण सौंपे हैं। आवश्यकता पड़ने पर ईडी उन्हें दोबारा तलब कर सकती है।
बता दे कि ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्नम इकॉनॉमी कॉरिडोर में हुए मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताओं की शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, प्रवर्तन निदेशालय, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), एंटी करप्शन ब्यूरो, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से की थी।
शिकायत के बाद रायपुर के तत्कालीन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने इस प्रकरण में अपराध दर्ज किया। जांच में सामने आया कि मुआवजा वितरण में की गई गड़बड़ियों से शासन को करीब 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इस मामले में EOW अब तक तीन तत्कालीन पटवारियों—दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती धृतलहरे—को गिरफ्तार कर चुकी है। 29 अक्टूबर 2025 को हुई इन गिरफ्तारियों के बाद हाल ही में विशेष न्यायालय, रायपुर में प्रकरण का पहला पूरक चालान भी प्रस्तुत किया जा चुका है।



