बीजापुर। इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) में तीन बाघों के शिकार के मामले की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाघों की लोकेशन कथित रूप से वन विभाग के अंदरूनी तंत्र से लीक होने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में विभागीय लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच अभी जारी है।
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सूत्रों के अनुसार, आईटीआर में बाघों की गणना के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप में अप्रैल-मई के दौरान फरसेगढ़ क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी दर्ज हुई थी। आशंका है कि इन्हीं कैमरों से मिली जानकारी किसी माध्यम से शिकारियों तक पहुंची, जिससे उन्हें बाघों की गतिविधियों का सटीक पता चल गया। इसके बाद करीब एक महीने के भीतर तीन बाघों का शिकार कर उनकी खाल निकाल ली गई।
बताया जा रहा है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैपिंग के दौरान 12 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों को आशंका है कि शिकार हुए बाघों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के दौरान शिकारी गिरोह से कथित संपर्क के आरोप में पैदल गार्ड कुंदन मंडावी को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को विभागीय लापरवाही, उदासीनता और निर्देशों की अनदेखी के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। विभागीय आदेश में उल्लेख किया गया है कि गंभीर चूक के कारण यह घटना हुई।
जानकारी के मुताबिक, बाघों का शिकार कोर एरिया के पेनगुंडा बीट में हुआ। वन विभाग की आंतरिक व्यवस्था में ट्रैकर और बीट गार्ड कैमरा ट्रैप की निगरानी और रिपोर्टिंग का कार्य करते हैं। राज्य में स्टाफ की कमी के कारण एक-एक बीट गार्ड को कई बीटों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिसका फायदा शिकारियों ने उठाया हो सकता है।
आईटीआर के उप संचालक संदीप बगला ने कहा कि मामले की जांच जारी है, इसलिए विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रारंभिक जांच में विभागीय स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके आधार पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जांच एजेंसियां इस मामले में अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका भी खंगाल रही हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, मध्य भारत में सक्रिय पारधी गिरोह लंबे समय से वन्यजीव तस्करी में संलिप्त रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हुए हालिया शिकार के पीछे भी इसी तरह के संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वन्यजीव अपराध से जुड़ी एजेंसियों का कहना है कि बाघों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय मांग के आधार पर ऐसे गिरोह ‘ऑन डिमांड’ शिकार करते हैं। फिलहाल मामले की बहुस्तरीय जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क तथा जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।




