सावन का पवित्र महीना इस वर्ष 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। भगवान शिव को समर्पित यह महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सावन के दौरान दो प्रमुख खगोलीय घटनाएं—12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण—होने जा रही हैं। ऐसे में ग्रहण को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।
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हालांकि, ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
कब और कहां दिखाई देगा ग्रहण?
12 अगस्त को सूर्य ग्रहण
12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, उत्तरी यूरोप और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
28 अगस्त को चंद्र ग्रहण
28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत में दिखाई देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे जुड़े नियमों का पालन किया जा सकता है।
राशियों पर संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर समान नहीं होता। कुछ राशियों के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
मिथुन राशि: कार्यक्षेत्र में बदलाव या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। धैर्य और संयम बनाए रखें।
तुला राशि: आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। इस दौरान बड़े निवेश या जोखिम भरे वित्तीय निर्णय लेने से बचें।
वृश्चिक राशि: स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। योग और ध्यान लाभदायक हो सकते हैं।
मीन राशि: रुके हुए कार्यों में गति मिलने के संकेत हैं, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी न करें।
ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है।
- ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद अन्न, वस्त्र या जरूरतमंदों को दान करें।
- सात्विक भोजन और दिनचर्या का पालन करें।
- धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग ग्रहण के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचते हैं।
नोट: ग्रहण एक प्राकृतिक एवं खगोलीय घटना है। इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। राशियों पर बताए गए प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।



