पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
जय छत्तीसगढ़, विजय छत्तीसगढ़
सियान मन ला प्रणाम, संगवारी मन ला जय जोहार
एक तरफ जहां अयोध्या में राम मंदिर के दान और चढ़ावे के चोरी और हेराफेरी के मामले में पूरे देश में बवाल मचा हुआ है और भंयकर तीखी प्रतिक्रिया है वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “राम, कृष्ण, नारायण” के मठ-मंदिरों में किये गये गबन-घोटालो-फर्जीवाडो पर एक लंबी और गहरी चुप्पी बनी हुई है, किसकी यह बताने की आवश्यकता शायद आप को नहीं है क्योंकि आप सभी बहुत अच्छी तरह जानते है कि जांच, कार्यवाही और फैसला किसको लेना है।
राजधानी के राम, कृष्ण, नारायण के द्वार जिसे आप जैतुसाव मठ कहिए, या रामचंद्र स्वामी नागरीदास मंदिर, विरंचीनारायण-नरसिंगनाथ मंदिर या गोपीदास मंदिर कहिए। तो फ़र्क क्या पड़ेगा, है तो ये छत्तीसगढ़िया आस्था के केंद्र। इन आस्था के केन्द्रों में बरसों से हिंदू धर्मावलंबीयो के दान का कोई हिसाब-किताब नहीं है और ना सरकार पूछ रही है। “राम, कृष्ण, नारायण” कि सैकड़ों एकड़ जमीनें बेच दी गई, सोने चांदी के जेवरात और बर्तनों का अता-पता नहीं है, यहां तक कि बैंकों में जमा करोड़ों रुपए बगैर शासकीय अनुमति के निकाल लिए गए फिर भी जांच और कार्रवाई के नाम पर मिल रही है तारीख पर तारीख।
बदल रहे हैं राज्य के मुखिया,बदल रहे है जिले के माई-बाप और कप्तान। पर “राम, कृष्ण और वासुदेव” बांट जोह रहे हैं अपने अपने अपने मठ-मंदिरों से की शायद कभी हमें भी मिलेगा इंसाफ…….? इंतजार है कि शायद हमारे “अपराधियों” को भी भेजा जायेगा सलाखों के पीछे। चिर ध्यान में राम, कृष्ण और नरसिंह” इस उम्मीद में है कि मेरे “विष्णु, विजय और अरुण” लेंगे कठोर फैसले और करेंगे यहां भी “न्याय” ? वैसे वो तो आयेंगे नहीं इस धरा में, वो तो बनाते हैं व्यक्तियों को माध्यम अपनी बनाई हुई व्यवस्था के लिए।
या फिर राम के ननिहाल में भी आयेगा कोई “योगी”, करेगा कोई फैसला और दहाड़ कर कहेगा “राम-कृष्ण के इन अपराधियों और ऐसे माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे…………”
आप भी गौर करें इस मामले में, क्या सोचते हैं लिखिए कमेंट्स में और बात मुद्दे की है तो शेयर करे हर छत्तीसगढ़िया को ! क्या मुद्दा बनेगा मुहिम ……….



