रायगढ़/बलरामपुर/कोरिया, 09 जून। Elephant Attack : छत्तीसगढ़ में इन दिनों इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता संघर्ष चिंता का बड़ा कारण बन गया है। एक तरफ रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में 25 दिनों के भीतर 4 हाथी शावकों की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर पिछले 30 घंटों के भीतर हाथियों के हमले में 4 लोगों की मौत ने ग्रामीण इलाकों में दहशत फैला दी है।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में मरे हाथी शावकों में संक्रमण पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार एक शावक की मौत हेपेटाइटिस यानी लिवर संक्रमण और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया यानी रक्त संक्रमण के कारण हुई है। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि भी हो चुकी है।
वन विभाग के अनुसार सभी मृत शावक एक ही हाथी दल के थे। लगातार हो रही मौतों को देखते हुए सैंपल देहरादून और बरेली की प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने हाथियों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
दंतैल हाथी ने कुचलकर मार डाला
इधर, बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दंतैल हाथी ने पति-पत्नी को कुचलकर मार डाला। ग्राम कुंदी के बांधपारा निवासी जूठन गोंड़ (65) और उनकी पत्नी सुंदरी बाई (56) सुबह जंगल की ओर जा रहे थे, तभी हाथी ने उन पर हमला कर दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वन विभाग के मुताबिक 5 हाथियों का दल इलाके में घूम रहा है और एक दंतैल हाथी दल से बिछड़कर गांव की ओर पहुंच गया था। घटना के बाद आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
वहीं दूसरी घटना कोरिया जिले के गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हुई, जहां रविवार देर रात एक दंतैल हाथी ने सड़क किनारे सो रहे दो मजदूरों पर हमला कर दिया। हमले में गौरव (22) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल अमर सिंह (35) ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। वन विभाग ने बताया कि इलाके में 8 हाथियों का दल घूम रहा था, जिनमें से एक दंतैल हाथी दल से अलग हो गया था। उसी हाथी ने मजदूरों पर हमला किया।
लगातार हो रही घटनाओं के बाद वन विभाग ने रायगढ़, धरमजयगढ़, बलरामपुर और कोरिया के जंगल क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल और वनकर्मी लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। ड्रोन, ट्रैप कैमरे और थर्मल ड्रोन की मदद से भी निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियां, हाथियों के प्राकृतिक मार्गों में हस्तक्षेप और संक्रमण जैसी समस्याएं इंसान-हाथी संघर्ष को और गंभीर बना रही हैं। वन विभाग अब हाथियों की सुरक्षा और ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है।



