गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों पर शिकारी का खतरा आज भी जस का तस बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या वन विभाग का पूरा तंत्र सिर्फ नौकरी और सैलरी तक सीमित रह गया है, या फिर वाकई वन्यजीवों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है? लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि सिस्टम में लापरवाही है, लेकिन इसी सिस्टम के बीच कुछ ऐसे जांबाज़ अधिकारी भी हैं, जो वन्यजीवों की जान बचाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं।
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ऐसा ही एक साहसिक और प्रेरक मामला उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व से सामने आया है। शिकारियों द्वारा तेंदुए के शिकार के लिए लगाए गए तार के फंदे में एक तेंदुआ फंस गया, जिससे उसकी जान पर बन आई। करीब 7 दिनों से तेंदुए के गले में दो क्लच वायर के फंदे फंसे हुए थे, सांस घुट रही थी और वह दर्द से बेहाल था। इसी वजह से तेंदुआ आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था, जिससे बड़े हमले की आशंका भी बन गई थी।
वन विभाग को सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन जब ड्रोन तकनीक भी फेल हो गई, तब एसडीओ गोपाल कश्यप ने खुद मोर्चा संभाला। बिना किसी डर के, जान जोखिम में डालते हुए उन्होंने रस्सी के जाल से तेंदुए को काबू किया। इस दौरान तेंदुआ आक्रामक भी हुआ, लेकिन सूझबूझ और साहस से रेस्क्यू को अंजाम दिया गया।
इसके बाद जंगल सफारी के डॉक्टर जय किशोर जडिया और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को बेहोश किया, गले में फंसे दोनों फंदे निकाले और तत्काल इलाज किया। समय रहते उपचार मिलने से तेंदुए की जान बच गई।
इस पूरे मामले पर उदंती–सीतानदी टाइगर रिज़र्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने कहा कि अवैध शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। शिकारियों तक पहुंचने के लिए इनाम योजना भी लागू की गई है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।



