रायपुर। राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी के दौरान आम लोगों के बीच मुर्रा वितरित किया गया। लोगों को नाश्ता बांटने की इस पहल पर अब पैकिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मुर्रा बांटने के लिए जिस पॉलिथीन का इस्तेमाल किया गया, उस पर दिसंबर 2022 की एक्सपायरी डेट दर्ज थी।
पुरानी तुवर दाल की पैकिंग में बांटा गया मुर्रा!
बताया जा रहा है कि मुर्रा वितरण के लिए इस्तेमाल की गई पॉलिथीन पिछली भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत तुवर दाल की पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जाती थी। पैकेट पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से अंकित होने का दावा किया जा रहा है। यही वजह है कि आयोजन के दौरान इस्तेमाल की गई पैकिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
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आखिर किसकी है जिम्मेदारी?
मुर्रा वितरण के दौरान आम नागरिकों के साथ मीडिया कर्मियों को भी पैकेट दिए गए। अब सवाल उठ रहा है कि यदि एक्सपायरी डेट वाली पैकिंग का इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी जांच और जिम्मेदारी तय कौन करेगा? क्या वितरण से पहले पैकेटों की जांच नहीं की गई थी या फिर पुराने स्टॉक का इस्तेमाल कर लिया गया?
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पैकेट पर दर्ज एक्सपायरी डेट का संबंध केवल पुरानी पैकिंग से था या उसमें रखी खाद्य सामग्री की वैधता से भी कोई संबंध था।
अब देखना होगा कि सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई करती है।




