दुर्ग/रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के कथित किंगपिन सौरभ चंद्राकर के खिलाफ दुर्ग जिले में पहली FIR मार्च 2022 में दर्ज हुई थी। जामुल थाने में दर्ज इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को सौरभ के कथित सट्टा नेटवर्क और बैंक खातों से जुड़े अहम सुराग मिले। बाद में इसी प्रकरण में पुलिस ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई की।
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अब ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सौरभ चंद्राकर को CBI की टीम रायपुर लेकर पहुंच चुकी है। मंगलवार शाम करीब 6 बजे फ्लाइट से रायपुर पहुंचने के बाद उसे सीधे माना स्थित CBI के कैंप कार्यालय ले जाया गया। बुधवार 4 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए रिमांड मांगे जाने की तैयारी है।
पुष्पक नगर में छापे से खुली सट्टे की परतें
मार्च 2022 में पुष्पक नगर इलाके में तत्कालीन CSP जितेंद्र यादव और टीआई वीरेंद्र श्रीवास्तव की टीम ने छापेमारी की थी। कार्रवाई के बाद आलोक सिंह, खड़क सिंह, रामप्रवेश साहू, अभिषेक और पिंटू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया।
पुलिस ने आलोक सिंह, खड़क सिंह और रामप्रवेश साहू के कब्जे से 17 बैंक खाते, 61 ATM कार्ड, लैपटॉप और कई मोबाइल फोन बरामद किए थे। बैंक खातों की जांच के दौरान पुलिस को सौरभ चंद्राकर से जुड़े कथित लेन-देन की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने सट्टे का पैनल संचालित करने वाले आरोपी आलोक सिंह से पूछताछ की। उसके बयान के आधार पर सौरभ चंद्राकर के साथ रवि उत्पल और राज गुप्ता के नाम भी मामले में जोड़े गए।
पुलिस के मुताबिक ऐसे चलता था कथित ऑनलाइन सट्टे का खेल
जांच के दौरान दिए गए आलोक सिंह के कथित बयान के अनुसार, उसे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए अभिषेक और पिंटू से संपर्क हुआ था। आरोप है कि दोनों ने उसे महादेव बुक की ऑनलाइन लेजर यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया, जिसके जरिए वह ग्राहकों की आईडी बनाकर ऑनलाइन सट्टा खिलाता था।
बयान के मुताबिक, रामप्रवेश ग्राहकों की आईडी और क्वाइन का हिसाब-किताब रखता था, जबकि आलोक लैपटॉप के जरिए ग्राहकों के भुगतान के आधार पर आईडी तैयार करने और क्वाइन डालने का काम करता था। खड़क सिंह पर ग्राहकों के जीतने की स्थिति में रकम जमा करने और निकालने का काम करने का आरोप लगाया गया।
‘5 लाख क्वाइन दिए गए, एक क्वाइन की कीमत एक रुपया’
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कथित बयान में यह भी बताया गया कि अभिषेक और पिंटू ने ऑनलाइन साइट के लिए आईडी-पासवर्ड के साथ 5 लाख क्वाइन उपलब्ध कराए थे। बयान में एक क्वाइन की कीमत एक रुपये बताए जाने का उल्लेख है।
आलोक के कथित बयान के मुताबिक, वह इससे पहले करीब तीन महीने आजमगढ़ और दो महीने हैदराबाद में भी इसी तरह के काम से जुड़ा था। ऑनलाइन साइट और कथित सट्टा संचालन के लिए अलग-अलग बैंक खातों और सिम कार्ड की जरूरत पड़ती थी, जिन्हें फर्जी KYC के जरिए हासिल करने का आरोप बयान में लगाया गया है।
बयान में सौरभ समेत तीन बड़े नामों का जिक्र
आलोक के कथित बयान में यह भी कहा गया कि अभिषेक और पिंटू के जरिए उसे जानकारी मिली थी कि सौरभ चंद्राकर, रवि उत्पल और राज गुप्ता महादेव बुक के काम से जुड़े हुए हैं। इसी बयान और बैंक लेन-देन से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने इन नामों को केस की जांच में शामिल किया।
दुबई से ओमान भागा, फिर हुआ गिरफ्तार
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद सौरभ चंद्राकर के दुबई से ओमान भागने की जानकारी सामने आई थी। बताया जा रहा है कि वह कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ओमान पहुंचा था, जहां 8 जुलाई 2026 को स्थानीय पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
ओमान से प्रत्यर्पण के बाद CBI उसे भारत लेकर आई और दिल्ली में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रायपुर लाया गया है। अब विशेष CBI अदालत में पेशी के बाद जांच एजेंसी की पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महादेव सट्टा नेटवर्क का संचालन कैसे होता था, पैसों का लेन-देन किन माध्यमों से हुआ और इसमें कथित तौर पर कौन-कौन लोग जुड़े थे।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस के समक्ष दर्ज बयानों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।




